फ्यूजन एनर्जी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Commonwealth Fusion Systems को US CHIPS Act के तहत **$85 मिलियन** की सरकारी ग्रांट मिली है। यह फंड कंपनी को लैब रिसर्च से आगे बढ़कर कमर्शियल पावर प्लांट इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में मदद करेगा।
फ्यूजन एनर्जी पर काम कर रही स्टार्टअप Commonwealth Fusion Systems को अमेरिकी सरकार से $85 मिलियन की बड़ी आर्थिक सहायता मिली है। यह ग्रांट 'CHIPS Act' के तहत दी गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देना है। इस पूंजी का उपयोग विशेष रूप से फ्यूजन रिएक्टरों को कंट्रोल करने के लिए जरूरी एडवांस्ड पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर्स के उत्पादन में किया जाएगा।
हाई-पावर हार्डवेयर पर फोकस
फ्यूजन एनर्जी के दौरान अत्यधिक गर्म प्लाज्मा को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती होती है, जिसके लिए शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड और सटीक एनर्जी कंट्रोल की जरूरत होती है। इस ग्रांट का उपयोग कंपनी 'सिलिकॉन कार्बाइड' पावर इलेक्ट्रॉनिक्स विकसित करने में करेगी, जो पारंपरिक सिलिकॉन की तुलना में हाई वोल्टेज और हीट को बेहतर ढंग से झेल सकते हैं। इससे रिएक्टर के पार्ट्स की लाइफ बढ़ेगी और ऑपरेशन के दौरान होने वाला एनर्जी लॉस भी कम होगा।
कमर्शियल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर कदम
निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि फ्यूजन टेक्नोलॉजी अब केवल थ्योरेटिकल रिसर्च से निकलकर इंडस्ट्रियल एप्लिकेशन की दिशा में बढ़ रही है। कंपनी अब AI हार्डवेयर को पावर प्लांट ऑपरेशंस में इंटीग्रेट करने और सप्लाई चेन तैयार करने पर जोर दे रही है, ताकि भविष्य में इसे स्केल किया जा सके।
चुनौतियां और भविष्य
हालांकि यह ग्रांट एक बड़ा सकारात्मक कदम है, लेकिन फ्यूजन एनर्जी का कमर्शियल इस्तेमाल अभी भी शुरुआती दौर में है। इसमें हाई कैपिटल स्पेंडिंग और तकनीकी अनिश्चितताएं अभी भी बरकरार हैं। निवेशकों की नजर अब कंपनी के 'Sparc' रिएक्टर पर है, जिसकी टेस्टिंग जल्द शुरू होने वाली है। इस प्रोजेक्ट की सफलता ही तय करेगी कि क्या यह हार्डवेयर डेवलपमेंट वास्तव में एक स्केलेबल एनर्जी सोर्स बन पाएगा या नहीं।
