इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में ₹192 की कटौती की है, जो 1 अगस्त से लागू हो गई है। यह लगातार दूसरे महीने की कटौती है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यवसायों के ऑपरेटिंग कॉस्ट में कमी आएगी। हालांकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
कॉमर्शियल एलपीजी सस्ता, व्यवसायों को मिली राहत
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने एक बार फिर कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों के दाम घटाकर व्यवसायों को बड़ी राहत दी है। 1 अगस्त से 19 किलो वाले नॉन-डोमेस्टिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹192 की कटौती की गई है, जिसके बाद यह अब ₹2,738 प्रति यूनिट हो गया है। इसके साथ ही, 5 किलो वाले नॉन-डोमेस्टिक रिफिल की कीमत भी ₹46.50 घटकर ₹762 हो गई है। यह लगातार दूसरा महीना है जब कॉमर्शियल एलपीजी की कीमतों में गिरावट आई है।
फेस्टिव सीजन से पहले बिजनेस को बूस्ट
यह कटौती खास तौर पर होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेवाओं जैसे व्यवसायों के लिए अहम है, क्योंकि वे अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कॉमर्शियल एलपीजी पर निर्भर रहते हैं। ईंधन लागत उनके कुल खर्च का एक बड़ा हिस्सा होती है। लगातार दो महीनों से कीमतों में कमी आने से इन व्यवसायों को अपने प्रॉफिट मार्जिन को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलेगी। यह राहत त्योहारी सीजन से ठीक पहले मिली है, जब ऐसे व्यवसायों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ने और मांग में तेजी आने की उम्मीद होती है।
घरेलू सिलेंडर पर कोई असर नहीं
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इस कटौती का असर केवल कॉमर्शियल सिलेंडरों पर पड़ा है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और वे पहले की तरह ही स्थिर हैं। भारत में एलपीजी की कीमतों का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय ऑयल और गैस के बेंचमार्क पर आधारित होता है। ग्लोबल एनर्जी की कीमतों में उतार-चढ़ाव आयात लागत को प्रभावित करता है, और IOC जैसी सरकारी तेल विपणन कंपनियां इन अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल के आधार पर समय-समय पर नॉन-डोमेस्टिक सिलेंडरों की कीमतें तय करती हैं।
इंडस्ट्री आउटलुक
कॉमर्शियल ईंधन की कीमतों में यह गिरावट प्रोडक्शन और सर्विस-ओरिएंटेड इंडस्ट्रीज के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इनपुट कॉस्ट में कमी आने से कंपनियों को अपने कैश फ्लो को बेहतर तरीके से मैनेज करने में मदद मिलती है और मार्जिन पर तत्काल दबाव कम होता है। हालांकि, यह भी सच है कि हाल के वैश्विक ऊर्जा मूल्य अस्थिरता से पहले के ऐतिहासिक स्तरों की तुलना में कॉमर्शियल एलपीजी की दरें अभी भी थोड़ी ऊंची बनी हुई हैं।
