केंद्रीय कोयला मंत्री G. Kishan Reddy ने स्पष्ट किया है कि बढ़ती बिजली की मांग के बावजूद देश में कोयले का स्टॉक पर्याप्त है। सरकार थर्मल पावर प्लांट्स को निर्बाध ईंधन देने के लिए रेलवे रेक लॉजिस्टिक्स को तेजी से बढ़ा रही है, ताकि पावर कंपनियों के मार्जिन पर दबाव न आए।
केंद्रीय कोयला मंत्री G. Kishan Reddy ने आश्वासन दिया है कि देश में कोयले की सप्लाई पूरी तरह से कंट्रोल में है। मौजूदा समय में बिजली की मांग में 12-15% तक का बड़ा उछाल देखने को मिला है, जिसे पूरा करने के लिए सरकार ने रेलवे रेक (Railway Rakes) की तैनाती को तेज कर दिया है ताकि पावर स्टेशनों तक कोयला समय पर पहुंच सके।
पावर सेक्टर के लिए क्यों अहम है यह?
भारत की ज्यादातर बिजली थर्मल पावर प्लांट्स से आती है। हाल ही में पीक पावर डिमांड 230-gigawatt के आंकड़े को पार कर गई है और मानसून की वजह से हाइड्रो पावर उत्पादन पर असर पड़ा है, जिससे कोयले से चलने वाले स्टेशनों पर बोझ काफी बढ़ गया है। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि अगर कोयले का स्टॉक कम होता है, तो कंपनियों को मजबूरन महंगा 'इंपोर्टेड कोयला' खरीदना पड़ता है, जिससे उनके ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margins) पर सीधा असर पड़ता है और मुनाफे में कमी आती है।
क्यों आई थी सप्लाई में कमी?
सितंबर के मध्य में भारी मानसून के कारण माइनिंग साइट्स पर उत्पादन धीमा पड़ गया था। सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के आंकड़ों के मुताबिक, 19 सितंबर तक देश के 74 पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक काफी कम था, जो पिछले हफ्ते 60 प्लांट्स था। हालांकि, सरकार का कहना है कि अब हालात सामान्य हो रहे हैं और लॉजिस्टिक्स में सुधार से कोयले की कमी का जोखिम कम हो गया है।
आगे की रणनीति
सरकार का विजन अब इंपोर्टेड ईंधन पर निर्भरता कम करने का है। इसके लिए Angul Park जैसे रीजनल माइनिंग हब विकसित किए जा रहे हैं। घरेलू स्तर पर माइनिंग और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करके सरकार भविष्य में किसी भी तरह की लॉजिस्टिक अड़चन को खत्म करना चाहती है, ताकि बिजली कंपनियों के ईंधन खर्च में स्थिरता बनी रहे।
