देशभर के थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का भंडार खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रिकॉर्ड तोड़ बिजली की मांग के चलते कोयला सिर्फ 13 दिनों के लिए ही बचा है। ऐसे में कई राज्यों में पावर कट की समस्या गहराने लगी है।
Detailed Coverage
बिजली संकट गहराया, कोयले की कमी
भारत का पावर सेक्टर एक गंभीर सप्लाई चुनौती का सामना कर रहा है। थर्मल पावर स्टेशनों में कोयले का भंडार घटकर करीब 4.07 करोड़ टन रह गया है। यह स्तर सिर्फ 13 दिनों के ऑपरेशन के लिए पर्याप्त है। मई में यह बफर 19 दिनों का था, जब कोयले का भंडार 5.3 करोड़ टन था। यह कमी तब आई है जब देश में बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई है, और 17 जुलाई तक पीक डिमांड करीब 270 गीगावाट तक पहुंच गई थी।
एल नीनो का असर, हाइड्रो पावर में गिरावट
ऊर्जा संकट का एक बड़ा कारण एल नीनो मौसम की घटना है, जिसने मौसमी पैटर्न को बिगाड़ दिया है। कमजोर मॉनसून का सीधा असर रिन्यूएबल एनर्जी, खासकर हाइड्रोपावर और विंड पावर पर पड़ा है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, भारत की हाइड्रोपावर जेनरेशन पिछले साल की तुलना में 6.3 गीगावाट कम हो गई है। इसके अलावा, राष्ट्रीय जलाशय स्तर पिछले साल की तुलना में 39% कम है, जिसमें 16 जुलाई तक 63.25 अरब क्यूबिक मीटर पानी जमा था। हाइड्रो और विंड स्रोतों से कम योगदान के कारण, थर्मल पावर प्लांटों पर ऊर्जा की कमी को पूरा करने का भारी दबाव है।
थर्मल प्लांट बंद, ग्रिड पर दबाव
ईंधन की आपूर्ति की कमी के अलावा, थर्मल सेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता से भी जूझ रहा है। आधिकारिक रिपोर्टों से पता चलता है कि लगभग 44.45 गीगावाट थर्मल क्षमता, जो देश की 224 गीगावाट की इंस्टॉल क्षमता का लगभग 20% है, तकनीकी खराबी के कारण वर्तमान में बंद है। इन फोर्स आउटेज (forced outages) के कारण ग्रिड की उच्च खपत स्तरों को पूरा करने की क्षमता और सीमित हो गई है, जिससे लोड शेडिंग और पावर कट में वृद्धि हुई है। पंजाब, हरियाणा और गोवा सहित कई राज्यों ने बिजली की कमी की सूचना दी है, और 19 जुलाई को राष्ट्रीय घाटा 23 मिलियन यूनिट तक पहुंच गया था। हालांकि 21 जुलाई तक कुल बिजली की मांग घटकर 250 गीगावाट हो गई थी, फिर भी ऊर्जा की कमी सामान्य मौसमी स्तरों से अधिक बनी हुई है।
निवेशकों के लिए मुख्य बिंदु
निवेशकों और बाजार पर्यवेक्षकों के लिए, मुख्य ध्यान ईंधन आपूर्ति श्रृंखला और प्लांट की उपलब्धता पर बना रहेगा। पावर कंपनियों की घरेलू उत्पादन और आयात के माध्यम से पर्याप्त कोयला हासिल करने की क्षमता ऑपरेटिंग मार्जिन बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कारक होगी। इसके अतिरिक्त, थर्मल प्लांट कितनी तेजी से तकनीकी खराबी को दूर कर सकते हैं और बंद क्षमता को ग्रिड में वापस ला सकते हैं, यह आने वाले हफ्तों में बिजली की कमी की आवृत्ति निर्धारित करेगा। जलाशय स्तरों और मॉनसून की प्रगति पर लगातार नजर रखना भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इन क्षेत्रों में किसी भी सुधार से कोयला आधारित उत्पादन पर भारी निर्भरता कम हो सकती है और मौजूदा ग्रिड तनाव को कम किया जा सकता है।
