मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के कारण लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई गंभीर रूप से बाधित हुई है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने ग्लोबल थर्मल कोल की मांग को आसमान पर पहुंचा दिया है, जो कि ऊर्जा संक्रमण (energy transition) की गति को धीमा करने वाला है।
सप्लाई में आई इन बड़ी रुकावटों के चलते, मार्च 2026 तक FOB Newcastle जैसे बेंचमार्क कोयले की कीमतें $126 प्रति टन के औसत तक पहुंच गईं, जबकि स्पॉट सौदों में यह $132 प्रति टन तक जा पहुंची। यह फरवरी के $114 प्रति टन के स्तर से एक बड़ी बढ़ोतरी है। एलएनजी की किल्लत और ऊंची कीमतों के बीच, खासकर एशिया और यूरोप के देश बिजली उत्पादन के लिए कोयले का रुख कर रहे हैं ताकि ऊर्जा सुरक्षा (energy security) सुनिश्चित की जा सके। ताइवान अपने हसिंटा पावर प्लांट को फिर से शुरू करने की योजना बना रहा है, दक्षिण कोरिया कोयला आयात बढ़ा रहा है, और जापान परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को फिर से चालू करने पर विचार कर रहा है। भारत का औद्योगिक क्षेत्र भी एलएनजी और पेटकोक (petroleum coke) की ऊंची कीमतों के कारण कोयले की ओर लौट रहा है। यूरोपीय बाजारों में भी ऐसे ही हालात हैं, जहाँ इटली जैसे देश बंद पड़े कोयला संयंत्रों को फिर से सक्रिय करने पर विचार कर रहे हैं।
कोयले की बढ़ती मांग के साथ-साथ उत्पादन लागत भी बढ़ रही है। कच्चे तेल (crude oil) और डीजल (diesel) की ऊंची कीमतों से कोयला खदानों को चलाने और ईंधन के परिवहन का खर्च बढ़ जाता है। अनुमान है कि कच्चे तेल में $10 प्रति बैरल की बढ़ोतरी कोयला खदानों की लागत में $1-3 प्रति टन का इजाफा कर सकती है।
हालांकि, इन सबके बीच, रिन्यूएबल एनर्जी (renewable energy) का विकास अनवरत जारी है। 2024 में ग्लोबल रिन्यूएबल क्षमता में 16% की वृद्धि हुई, जिसमें पवन (wind) और सौर ऊर्जा (solar power) का 95% हिस्सा रहा। मार्च 2026 के आंकड़े बताते हैं कि ग्लोबल जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) उत्पादन में मामूली गिरावट के बावजूद, सौर ऊर्जा उत्पादन में 14% और पवन ऊर्जा में 8% की वृद्धि हुई।
जानकारों का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव जारी रहने और एलएनजी बाजारों में अस्थिरता के कारण निकट भविष्य में थर्मल कोल की कीमतें ऊंची बने रहने की संभावना है। हालांकि, विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026-2027 तक कीमतें कुछ स्थिर हो सकती हैं, और लंबी अवधि में रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते विस्तार के कारण इनमें गिरावट का रुख देखने को मिलेगा।