कोयला मंत्रालय ने **₹37,500 करोड़** की कोल गैसीफिकेशन योजना में कंपनियों की रुचि न होने की खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। मंत्रालय ने साफ किया कि NTPC और Talcher Fertilisers जैसी दिग्गज कंपनियों ने पहले ही बोली लगा दी है।
कोयला मंत्रालय ने ₹37,500 करोड़ की कोयला और लिग्नाइट गैसीफिकेशन योजना को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। मंत्रालय का कहना है कि यह योजना न केवल पटरी पर है, बल्कि प्रमुख खिलाड़ियों जैसे NTPC और Talcher Fertilisers ने इसमें भाग लेने के लिए आवेदन भी जमा कर दिए हैं। मई 2026 में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत यह योजना भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा कदम है।
क्यों है यह योजना अहम?
भारत का मकसद घरेलू कोयले को मेथेनॉल, अमोनिया, सिनगैस और यूरिया जैसे कीमती रसायनों में बदलना है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में इन उत्पादों का इंपोर्ट बिल करीब ₹2.77 लाख करोड़ तक पहुंच गया था। सरकार का लक्ष्य घरेलू प्रोडक्शन बढ़ाकर ग्लोबल मार्केट पर अपनी निर्भरता कम करना है।
रोलिंग एप्लीकेशन का फायदा
मंत्रालय ने बताया कि आवेदन की धीमी गति का कारण इन प्रोजेक्ट्स का बेहद जटिल होना है। इनमें फिजिबिलिटी स्टडी और साइट असेसमेंट जैसे भारी-भरकम काम शामिल होते हैं। इसीलिए सरकार ने इसे 'रोलिंग एप्लीकेशन' प्रोसेस के तहत रखा है। पहला विंडो 7 सितंबर 2026 को बंद हो रहा है, लेकिन इसके बाद हर दो महीने में नई विंडो खुलेगी, ताकि कंपनियों को अपनी कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
निवेशकों के लिए सीख
कोल गैसीफिकेशन जैसे प्रोजेक्ट्स में भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर लगता है और इनका जेस्टेशन पीरियड भी लंबा होता है। आने वाले समय में निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि भविष्य की विंडोज में प्राइवेट सेक्टर का उत्साह कैसा रहता है। प्रोजेक्ट का सक्सेस काफी हद तक रॉ मैटेरियल की कीमतों और एफिशिएंट एग्जीक्यूशन पर निर्भर करेगा।
