कोल मंत्रालय (Ministry of Coal) 22 जुलाई 2026 को अपनी पहली 'AAROH' यानी माइन क्लोजर पर वार्षिक रिपोर्ट जारी करने जा रहा है। इस रिपोर्ट में देश भर की 42 कोयला खदानों के साइंटिफिक पुनर्स्थापन (Scientific Restoration) का ब्यौरा होगा।
Detailed Coverage
42 खदानों के पुनर्स्थापन का होगा खुलासा
नई दिल्ली में 22 जुलाई 2026 को कोल मंत्रालय 'AAROH' का अनावरण करेगा। यह रिपोर्ट भारत की आजादी के बाद से 42 कोयला खदानों के बंद होने की प्रक्रिया का एक औपचारिक लेखा-जोखा पेश करेगी। इससे यह पता चलेगा कि माइनिंग कंपनियां थकी हुई साइटों के प्रबंधन, इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन और भूमि सुधार पर कैसे काम कर रही हैं।
स्थायी फ्रेमवर्क और जर्मन एजेंसी के साथ समझौता
खदानों के लाइफसाइकिल को मैनेज करने के लिए मंत्रालय ने RECLAIM, L.I.V.E.S. जैसे फ्रेमवर्क पेश किए हैं। SUVIKALP जैसे टूल्स माइनिंग कंपनियों जैसे Coal India Limited, NLC India Limited और The Singareni Collieries Company Limited (SCCL) को कोयला निकालने के बाद जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने में मदद करेंगे।
इसके अलावा, मंत्रालय ने जर्मनी की डेवलपमेंट एजेंसी GIZ के साथ एक टेक्निकल कोऑपरेशन एग्रीमेंट पर भी हस्ताक्षर किए हैं। यह पार्टनरशिप भारतीय कोयला क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता लाएगी। NTPC और कई प्राइवेट माइनिंग कंपनियां भी अपने प्रोजेक्ट्स को शोकेस करेंगी।
वोकेशनल ट्रेनिंग और सामाजिक जिम्मेदारी
पर्यावरणीय बहाली के साथ-साथ, मंत्रालय सामाजिक पहलुओं पर भी जोर दे रहा है। Bharat Coking Coal Limited (BCCL) और Jharia Rehabilitation and Development Authority (JRDA) जैसी संस्थाएं नए एग्रीमेंट कर रही हैं। इन MoUs का मकसद खदानों के पास वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटर खोलना है, ताकि स्थानीय लोगों को नए स्किल्स सिखाए जा सकें। Hindalco Industries Limited जैसी कंपनियां भी इस पहल का हिस्सा हैं।
निवेशकों के लिए, यह जानना अहम होगा कि इन क्लोजर नियमों का कोल प्रोड्यूसिंग कंपनियों की बैलेंस शीट पर क्या असर पड़ेगा। जैसे-जैसे खदानें बंद होंगी, निवेशक इस पर नज़र रखेंगे कि कंपनियां पर्यावरण नियमों और जमीन के बेहतर इस्तेमाल के लिए कितना फंड आवंटित करती हैं।
