Coal India का Gevra Mine बना दुनिया का सबसे बड़ा! पर ग्लोबल कोयला बाजार में आई मंदी

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Coal India का Gevra Mine बना दुनिया का सबसे बड़ा! पर ग्लोबल कोयला बाजार में आई मंदी
Overview

Coal India के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है! कंपनी का Gevra माइन दुनिया का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक बनने की तैयारी में है, जिसका लक्ष्य FY2026-27 तक सालाना 63 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना है। यह उपलब्धि ऐसे समय में आ रही है जब ग्लोबल कोयला ट्रेड अगले दो सालों तक यानी 2026 तक गिरावट का सामना करने वाला है।

गवर्रा माइन का दबदबा और ग्लोबल मंदी का सामना

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) का गवर्रा माइन, जो कोल इंडिया की सब्सिडियरी है, जल्द ही दुनिया की सबसे बड़ी कोयला उत्पादन इकाई बन सकता है। कंपनी का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2026-27 तक 63 मिलियन टन कोयला उत्पादन करना है, जो कि अमेरिका के ब्लैक थंडर माइन (जिसने 2022 में लगभग 56.41 मिलियन टन उत्पादन किया था) को पीछे छोड़ देगा। वर्तमान वित्त वर्ष में गवर्रा का उत्पादन लगभग 56 मिलियन टन है।

इसके बावजूद, हाल ही में कोल इंडिया लिमिटेड (COALINDIA) ने दिसंबर 2025 तिमाही के लिए अपने नेट प्रॉफिट में पिछले साल की तुलना में 16% की गिरावट दर्ज की है। कंपनी का नेट प्रॉफिट घटकर ₹7,166 करोड़ रह गया, जबकि रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशन्स में 5% की कमी आई और यह ₹34,924 करोड़ पर आ गया। कंपनी के शेयर का भाव लगभग ₹423.55 पर कारोबार कर रहा है, जिसका मार्केट कैप करीब ₹2.61 ट्रिलियन और ट्रेलिंग पी/ई रेश्यो (P/E Ratio) करीब 9.0 है। यह सब तब हो रहा है जब ग्लोबल सी-बोर्न कोयला ट्रेड में 2025 और 2026 में गिरावट का अनुमान है, जो 21वीं सदी में लगातार दो साल की पहली गिरावट होगी।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कोल इंडिया की नई राह

कोल इंडिया की रणनीति दोहरी दिख रही है - एक तरफ भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयला उत्पादन को बढ़ाना, और दूसरी तरफ भविष्य की ऊर्जा जैसे कि सोलर, गैसिफिकेशन और क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) में निवेश करना। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का डोमेस्टिक कोल प्रोडक्शन 1 बिलियन टन को पार कर चुका है, जिसमें CIL का बड़ा योगदान है। पावर सेक्टर कोयले का सबसे बड़ा उपभोक्ता बना हुआ है, जो वित्त वर्ष 2025 में 82% कोयला डिस्पैच का हकदार है।

इसके विपरीत, वैश्विक स्तर पर थर्मल कोयले की मांग घट रही है। यूरोप में 2026 तक थर्मल कोयले के इम्पोर्ट में 15%-20% की गिरावट की उम्मीद है, और पश्चिमी यूरोप में कोयला आधारित बिजली उत्पादन 40% से अधिक कम होने का अनुमान है।

गवर्रा के विस्तार को भारत की ऊर्जा सुरक्षा की निरंतर आवश्यकता का प्रमाण माना जा रहा है। लेकिन कंपनी सोलर पावर क्षमता 700 MW से बढ़ाकर 2027-28 तक 3 GW करने का लक्ष्य रख रही है। इसके साथ ही, कोल इंडिया की एक सब्सिडियरी SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) इसी साल IPO लाने की तैयारी में है, जो एक बड़ा कदम होगा।

विश्लेषकों की राय और भविष्य की चुनौतियाँ

विश्लेषकों का कोल इंडिया पर 'न्यूट्रल' (Neutral) कंसेंसस बना हुआ है, जिसका औसत 12-महीने का प्राइस टारगेट लगभग ₹418 है, जो यह दर्शाता है कि शेयर में ज्यादा तेजी की उम्मीद कम है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹5.50 प्रति शेयर का इंटरिम डिविडेंड (Interim Dividend) भी घोषित किया है, जो वर्तमान शेयर मूल्य पर लगभग 6.26% का यील्ड (Yield) देता है।

कंपनी का कोयला उत्पादन पर जोर, खासकर गवर्रा जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स में, घटती वैश्विक मांग और बढ़ते पर्यावरणीय दबाव के बीच एक बड़ा दांव है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) का अनुमान है कि 2027 तक वैश्विक बिजली मिश्रण में कोयले की हिस्सेदारी 31% से नीचे गिर जाएगी। कोयला उत्पादन में भारी भरकम निवेश वाली कोल इंडिया, भविष्य की एनर्जी ट्रांज़िशन (Energy Transition) नीतियों और स्ट्रैंडेड एसेट (Stranded Asset) के जोखिमों के प्रति संवेदनशील हो सकती है। हालिया तिमाही में मुनाफे में गिरावट और EBITDA मार्जिन का 33% तक गिरना (पिछले साल 43% से), जो एक बार के पे रिवीजन प्रोविजन (Pay Revision Provision) के कारण हुआ, परिचालन लागत में वृद्धि की ओर भी इशारा करता है।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.