Coal India का बड़ा दांव: **₹50,000 करोड़** से केमिकल हब बनेगा? आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी

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AuthorNeha Patil|Published at:
Coal India का बड़ा दांव: **₹50,000 करोड़** से केमिकल हब बनेगा? आयात पर निर्भरता घटाने की तैयारी
Overview

Coal India Limited (CIL) ने एक बड़ी स्ट्रेटेजिक चाल चलते हुए कोयला गैसीफिकेशन (Coal Gasification) प्रोजेक्ट्स में **₹50,000 करोड़** का भारी निवेश करने का ऐलान किया है। ये प्रोजेक्ट्स डाउनस्ट्रीम केमिकल्स और सिंथेटिक नेचुरल गैस (SNG) के उत्पादन पर फोकस करेंगे, जिसका लक्ष्य भारत की आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम करना है।

CIL अपनी अब तक की सबसे बड़ी डाइवर्सिफिकेशन (diversification) की शुरुआत कर रही है, जिसमें कोयला गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स पर करीब ₹50,000 करोड़ का निवेश किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना का मकसद डाउनस्ट्रीम केमिकल्स और क्लीनर फ्यूल्स का उत्पादन करना है, जिससे CIL सिर्फ कोयला सप्लायर से आगे बढ़कर एक इंटीग्रेटेड एनर्जी और केमिकल्स प्लेयर के तौर पर स्थापित हो सके। यह पहल सरकार के नेशनल कोल गैसीफिकेशन मिशन (National Coal Gasification Mission) के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाना और महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल फीडस्टॉक (industrial feedstock) व नेचुरल गैस के आयात पर निर्भरता को कम करना है।

इस एक्सपेंशन का फ्लैगशिप कंपोनेंट ओडिशा के लखनपुर में 6.6 लाख टन प्रति वर्ष (Lakh Tonnes Per Annum) की क्षमता वाला अमोनियम नाइट्रेट (Ammonium Nitrate) प्लांट है। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के साथ भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (Bharat Coal Gasification and Chemicals Limited) के तहत एक ज्वाइंट वेंचर (joint venture) के जरिए विकसित हो रहा यह प्रोजेक्ट, फाइनेंशियल ईयर 2030 (FY30) तक चालू होने की उम्मीद है और इसमें अनुमानित ₹25,000 करोड़ का निवेश होगा। अमोनियम नाइट्रेट माइनिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होने वाले एक्सप्लोसिव्स (explosives) के साथ-साथ फर्टिलाइजर प्रोडक्शन के लिए एक अहम रॉ मैटेरियल है, जो आयात के मुकाबले घरेलू विकल्प प्रदान करेगा।

CIL दो बड़े कोयला-से-सिंथेटिक नेचुरल गैस (Coal-to-SNG) प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है। पहला प्रोजेक्ट, जिसकी क्षमता 633 मिलियन नॉर्मल क्यूबिक मीटर प्रति वर्ष (Million Normal Cubic Metres Per Annum) है, पश्चिम बंगाल के बर्धमान में GAIL India Limited के साथ एक JV के तहत प्लान किया गया है, जिसका बजट ₹13,000 करोड़ है। दूसरा SNG प्रोजेक्ट महाराष्ट्र के चंद्रपुर में BPCL के साथ पार्टनरशिप में होगा, जिसमें लगभग ₹12,200 करोड़ का आउटले (outlay) लगेगा और इसकी क्षमता भी वैसी ही होगी। ये SNG प्रोजेक्ट्स फर्टिलाइजर यूनिट्स और इंडस्ट्रियल कंज्यूमर्स को क्लीनर फ्यूल सप्लाई करने का लक्ष्य रखते हैं।

इंडस्ट्री एनालिस्ट्स (Industry Analysts) इन कोयला-से-केमिकल और गैसीफिकेशन पहलों को पारंपरिक थर्मल पावर कोल बिक्री की तुलना में अधिक स्टेबल लॉन्ग-टर्म डिमांड विजिबिलिटी (long-term demand visibility) प्रदान करने वाला मानते हैं। अपने विशाल कोयला भंडार को वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स में बदलकर, CIL डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन्स को मजबूत कर रही है और बदलती एनर्जी लैंडस्केप (energy landscape) के मुकाबले अपने रेवेन्यू स्ट्रीम्स (revenue streams) को हेज (hedge) कर रही है। यह स्ट्रैटेजिक शिफ्ट कोल इंडिया को एक इंटीग्रेटेड एनर्जी और केमिकल्स प्रोड्यूसर के तौर पर स्थापित करता है, जो अगले दशक में भारत के इंडस्ट्रियल ग्रोथ और एनर्जी सिक्योरिटी में एक अहम भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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