सरकारी कंपनी Coal India अब कोयला खनन से आगे बढ़कर कोल गैसीफिकेशन और विदेशी क्रिटिकल मिनरल्स में कदम रखेगी। कंपनी इस विस्तार के लिए **₹50,000 करोड़** का निवेश करेगी, हालांकि भारी मानसून के चलते अगस्त में कंपनी का प्रोडक्शन **5.7%** घट गया है।
Coal India अब अपनी पारंपरिक थर्मल कोल माइनर की छवि से बाहर निकलकर एक नई दिशा की ओर बढ़ रही है। कंपनी ने ₹50,000 करोड़ के भारी-भरकम निवेश की योजना बनाई है, जिसका मुख्य उद्देश्य कोल गैसीफिकेशन और लिथियम, कॉपर जैसे क्रिटिकल मिनरल्स की खोज करना है। इस कदम से कंपनी हाई-वैल्यू केमिकल इंडस्ट्री में अपनी पैठ जमाना चाहती है।
गैसीफिकेशन पर जोर
कंपनी Bharat Heavy Electricals (BHEL) के साथ मिलकर 'Bharat Coal Gasification and Chemicals' के जरिए बड़े पैमाने पर गैसीफिकेशन फैसिलिटी तैयार कर रही है। यहां अमोनियम नाइट्रेट जैसे इंडस्ट्रियल केमिकल्स का उत्पादन होगा। हालांकि, कंपनी ने सरकार के सामने मौजूदा गैसीफिकेशन नियमों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं, खास तौर पर बिडिंग विंडो और कैप्टिव पावर प्लांट के नियमों को लेकर, जो पब्लिक सेक्टर की कंपनियों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकते हैं।
विदेशी बाजारों पर नजर
EV सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करने के लिए Coal India ने सिंगापुर में अपनी नई सब्सिडियरी 'CIL Global' बनाई है। यह कंपनी विदेशों में लिथियम, कॉपर और ग्रेफाइट जैसी कीमती खदानों को एक्वायर करने पर काम करेगी। यह स्ट्रैटेजी कंपनी को केवल कोयले पर निर्भर रहने के बजाय ग्लोबल रिसोर्स मार्केट में एक बड़ा खिलाड़ी बनाने के लिए है।
चुनौतियां और जोखिम
लंबी अवधि के इन लक्ष्यों के बीच कंपनी को तात्कालिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारी बारिश की वजह से प्रोडक्शन 5.7% घटकर 4.75 करोड़ टन पर आ गया है। हालांकि, ऑफटेक (ऑर्डर सप्लाई) में 5.5% की तेजी देखी गई है और यह 6.06 करोड़ टन रहा। निवेशकों के लिए अब देखने वाली बात यह होगी कि कंपनी बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर और डिविडेंड पेआउट के बीच कैसे तालमेल बिठाती है और नए प्रोजेक्ट्स को कितनी तेजी से जमीन पर उतारती है।
