Coal India ने पावर प्लांटों तक कोयले की सप्लाई तेज कर दी है। मानसून के कारण उत्पादन पर असर पड़ा है और डिमांड काफी ज्यादा है, ऐसे में कंपनी अपने पुराने स्टॉक (Reserves) का इस्तेमाल कर स्थिति संभाल रही है।
संकट की स्थिति क्या है?
देश भर के थर्मल पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक खतरनाक स्तर तक गिर गया है। अगस्त 2026 के अंत तक करीब 46 पावर प्लांटों में कोयले का भंडार इतना कम हो गया है कि वह 0 से 5 दिनों तक ही चल सकता है। बढ़ती गर्मी और औद्योगिक मांग के कारण बिजली सेक्टर पर लगातार दबाव बना हुआ है।
प्रोडक्शन बनाम सप्लाई का गणित
हालिया डेटा के मुताबिक, अगस्त 2026 में Coal India के प्रोडक्शन में 5.7% की गिरावट दर्ज की गई, जो 47.5 मिलियन टन रहा। इसकी मुख्य वजह ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे खनन इलाकों में भारी बारिश है। हालांकि, प्रोडक्शन घटने के बावजूद कंपनी ने कोयले की ऑफटेक (सप्लाई) में 5.5% का उछाल दिखाया है और यह 60.6 मिलियन टन रही।
कंपनी ने यह उपलब्धि 'पिटहेड स्टॉक' (Pithead Stocks) को लिक्विडेट करके हासिल की है। फिलहाल कंपनी के पास 76 मिलियन टन का कोयला स्टॉक बफर के रूप में मौजूद है। फाइनेंशियल ईयर के पहले पांच महीनों में कुल सप्लाई 6.7% बढ़कर 322.9 मिलियन टन पर पहुंच गई है।
निवेशकों के लिए जोखिम और चेतावनी
बेशक पुराने स्टॉक से फिलहाल संकट टल रहा है, लेकिन यह लंबे समय का समाधान नहीं है। निवेशकों को कंपनी के सितंबर और उसके बाद के प्रोडक्शन आंकड़ों पर बारीक नजर रखनी होगी। अगर बारिश कम होने के बाद नया प्रोडक्शन सामान्य नहीं होता है, तो मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके अलावा, माइनिंग कॉस्ट और लॉजिस्टिक्स के बढ़ते खर्च भी कंपनी के मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं। चूंकि भारत की 70% बिजली कोयले पर निर्भर है, इसलिए सप्लाई चेन में कोई भी अड़चन सीधे बाजार की धारणा को बदल सकती है।
