Coal India ने पावर प्लांट्स में कोयले की कमी को देखते हुए रोड-बेस्ड सप्लाई रूट खोल दिए हैं। मानसून की बाधाओं के चलते देश के **50** पावर प्लांट्स में कोयले का स्टॉक खतरनाक स्तर तक गिर गया है, जिसे पूरा करने के लिए कंपनी अब पिटहेड रिजर्व से तेजी से सप्लाई कर रही है।
लॉजिस्टिक्स में बड़ा बदलाव
Coal India ने अपने लॉजिस्टिक्स ढांचे में बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है। कंपनी अब थर्मल पावर प्लांट्स को सड़क मार्ग से कोयला उठाने की अनुमति दे रही है ताकि रेल कनेक्टिविटी की कमी और मानसून की बाधाओं के कारण पैदा हुए फ्यूल संकट को खत्म किया जा सके। आंकड़ों के मुताबिक, देश के 50 पावर प्लांट्स में स्टॉक का स्तर उनके जरूरी 'नॉर्मेटिव लेवल' के आधे से भी नीचे पहुंच गया है।
प्रोडक्शन बनाम सप्लाई का गणित
कंपनी फिलहाल उत्पादन और सप्लाई के बीच के अंतर को मैनेज करने की कोशिश कर रही है। अगस्त 2026 में Coal India का प्रोडक्शन 5.7% गिरकर 47.5 मिलियन टन रहा, जिसका बड़ा कारण भारी बारिश रही। हालांकि, कंपनी की कुल ऑफ-टेक (कोयला सप्लाई) 5.5% बढ़कर 60.6 मिलियन टन रही है। इसका मतलब है कि कंपनी अपने करीब 76 मिलियन टन के पिटहेड स्टॉक को तेजी से खाली कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इन्वेस्टर्स के लिए यह समझना जरूरी है कि कंपनी मौजूदा स्टॉक के भरोसे डिमांड पूरी कर रही है, जो लंबे समय के लिए एक चुनौती बन सकती है। इसके अलावा, सड़क मार्ग से कोयले की ढुलाई रेल की तुलना में महंगी पड़ती है, जिससे कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन्स पर दबाव आ सकता है। बाजार की नजर इस बात पर होगी कि मानसून के बाद प्रोडक्शन कितनी तेजी से सामान्य होता है और कंपनी अपने स्टॉक को कितनी जल्दी फिर से भर पाती है।
