प्रोडक्शन क्यों घटा, मांग क्यों बढ़ी?
अप्रैल में Coal India का उत्पादन 9.7% गिरकर 56.1 मिलियन टन पर आ गया। साथ ही, कंपनी की सप्लाई (offtake) में भी 2% की कमी आई और यह 63.2 मिलियन टन दर्ज की गई। यह सब तब हुआ जब देश की बिजली ग्रिड पर भारी दबाव था। भीषण गर्मी के चलते एयर कंडीशनर्स (ACs) का इस्तेमाल बढ़ा और बिजली की पीक डिमांड 255 गीगावाट के रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई।
हालांकि, पूरे फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए Coal India का उत्पादन सिर्फ 1.7% घटकर 768.1 मिलियन टन रहा। लेकिन, इसी दौरान देश की प्राइवेट कोल माइंस (captive and commercial mines) के प्रोडक्शन में 10.22% की जबरदस्त ग्रोथ देखी गई, जिन्होंने 200 मिलियन टन से ज्यादा का उत्पादन किया।
ऊर्जा क्षेत्र में बड़े बदलाव आ रहे हैं। रिन्यूएबल एनर्जी (Renewable Energy) स्रोत अब भारत की कुल नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता का लगभग आधा (250 GW से ज्यादा FY26 तक) बन चुके हैं। हालिया रिकॉर्ड बिजली मांग को पूरा करने में सौर ऊर्जा जैसे रिन्यूएबल सोर्सेज का योगदान लगभग एक तिहाई रहा। इसके बावजूद, भारत की 70% से ज्यादा बिजली अभी भी कोयले से ही बन रही है। ऐसे में, घरेलू सप्लायर Coal India के प्रोडक्शन में कमी का मतलब है कि देश को महंगा इंपोर्टेड कोल (imported coal) ज्यादा मंगाना पड़ सकता है।
कंपनी के प्रदर्शन में क्षेत्रीय भिन्नता भी देखी गई। Eastern Coalfields Ltd, Bharat Coking Coal Ltd, और Western Coalfields Ltd जैसी सब्सिडियरीज़ में प्रोडक्शन घटा। वहीं, South Eastern Coalfields Ltd और Central Coalfields Ltd ने अच्छी ग्रोथ दर्ज की। कंपनी ने अभी तक प्रोडक्शन में आई इस गिरावट के कारणों का खुलासा नहीं किया है।
विश्लेषकों (Analysts) की राय मिली-जुली है। जहां Coal India का घरेलू मार्केट में दबदबा है, वहीं बढ़ती मांग को पूरा करने की उसकी क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती हिस्सेदारी कोयले की मांग के लिए एक लंबी अवधि की चुनौती है। मौजूदा एनालिस्ट टारगेट प्राइस के मुताबिक, कंपनी के शेयर (जो फिलहाल करीब ₹481.45 पर ट्रेड कर रहा है) में सीमित तेजी की उम्मीद है। 12 महीने के औसत टारगेट प्राइस ₹431.38 से ₹457.50 के बीच हैं। कई विश्लेषकों ने 'होल्ड' (Hold) या 'न्यूट्रल' (Neutral) रेटिंग दी है, कुछ 'बाय' (Buy) रिकमेन्डेशन के बावजूद सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं।
