देश के 58 थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले की किल्लत बढ़ गई है। मानसून की भारी बारिश के कारण सप्लाई में आ रही बाधाओं को देखते हुए Coal India ने रोजाना कोयले की ढुलाई को बढ़ाकर **444 रेक** (rakes) कर दिया है।
भारत सरकार ने थर्मल पावर प्लांट्स में फ्यूल इन्वेंट्री में आई गिरावट के बाद कोयले की सप्लाई को तेजी से बढ़ाने का निर्णय लिया है। 5 सितंबर, 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 58 थर्मल पावर प्लांट्स में उनके जरूरी फ्यूल रिजर्व का 25% से भी कम स्टॉक बचा है, जो अगस्त के अंत में 46 था। इस कमी ने पावर ग्रिड की स्थिरता पर किसी भी खतरे को टालने के लिए तत्काल लॉजिस्टिकल एक्शन लेने पर मजबूर कर दिया है।
लॉजिस्टिकल बाधाओं का प्रबंधन
कोयले की इस कमी की मुख्य वजह ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे प्रमुख राज्यों में हो रही भारी मानसून बारिश है। बारिश के कारण माइनिंग क्षेत्रों में जलभराव हो गया है और रेल नेटवर्क भी प्रभावित हुआ है, जिससे कोयले को खानों से बिजली स्टेशनों तक पहुंचाना मुश्किल हो गया है। इसे देखते हुए सरकार ने रेल रेक की तैनाती बढ़ा दी है। 3 सितंबर को जहां 370 रेक की लोडिंग हो रही थी, वहीं 6 सितंबर तक इसे बढ़ाकर 444 रेक प्रतिदिन कर दिया गया है ताकि इन्वेंट्री को जल्द से जल्द रिस्टॉक किया जा सके।
Coal India का ऑपरेशनल रिस्पॉन्स
सरकारी कंपनी Coal India Limited के पास अभी भी लगभग 76 मिलियन टन कोयले का बड़ा बफर स्टॉक मौजूद है। स्थिति को संभालने के लिए कंपनी ने पावर जनरेटर्स को अनुमति दी है कि वे अपने एनुअल कॉन्ट्रैक्ट लिमिट से ज्यादा कोयला सड़क मार्ग (road transport) से मंगवा सकते हैं। यह कदम रेल लॉजिस्टिक्स की कमी को दूर करने में मदद करेगा।
निवेशकों के लिए यह स्थिति पावर सेक्टर की लॉजिस्टिक्स पर निर्भरता को दर्शाती है। हालांकि कंपनी की प्रोडक्शन कैपेसिटी मजबूत है, लेकिन सड़क मार्ग से कोयला ढुलाई का खर्च रेल के मुकाबले अधिक होता है, जिस पर आगे चलकर फाइनेंशियल अपडेट्स के दौरान नजर रखना जरूरी होगा। अब बाजार की नजर इस बात पर है कि मानसून के जाने के बाद प्रोडक्शन कितनी तेजी से रिकवर करता है और सप्लाई के ये उपाय कितने कारगर साबित होते हैं।
