Coal India Limited ने सरकार की **₹37,500 करोड़** की कोल गैसीफिकेशन स्कीम के नियमों पर आपत्ति जताई है। कंपनी का तर्क है कि **60 दिन** की बिडिंग विंडो और सब्सिडी शर्तों से प्राइवेट कंपनियों को अनुचित लाभ मिल रहा है।
सरकारी नियमों को लेकर Coal India Limited (CIL) और कोयला मंत्रालय के बीच तनातनी बढ़ गई है। विवाद की जड़ में ₹37,500 करोड़ की कोल गैसीफिकेशन स्कीम है। कंपनी का मानना है कि मौजूदा नियम उन्हें प्राइवेट प्लेयर्स के मुकाबले कमजोर स्थिति में डाल रहे हैं।
बिडिंग टाइमलाइन पर घमासान
सबसे बड़ा विवाद 60 दिन की बिडिंग विंडो को लेकर है। CIL ने इसके लिए 6 महीने का समय मांगा था, ताकि वह पूरी तैयारी कर सके। कंपनी का कहना है कि प्राइवेट कंपनियां पहले से ही तैयारी में जुटी हैं, जिससे उन्हें बढ़त हासिल है। मंत्रालय ने इस मांग को खारिज कर दिया है। यह निवेशकों के लिए अहम है क्योंकि इंसेंटिव पूल ₹9,000 करोड़ प्रति प्रोडक्ट कैटेगरी पर सीमित है, यानी जो पहले बिड करेगा, उसे फायदा मिलने की संभावना ज्यादा है।
प्रोजेक्ट की आर्थिक व्यवहार्यता (Financial Viability)
CIL इस बात से भी नाराज है कि मंत्रालय ने सब्सिडी के दायरे से 'कैप्टिव पावर प्लांट' के खर्च को बाहर कर दिया है। CIL इन प्लांट्स को कोयला वॉशरी के कचरे को इस्तेमाल करने के लिए तैयार करना चाहती थी। इस फैसले से कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट पर असर पड़ेगा, जिससे इसके मुनाफे और आकर्षण में कमी आ सकती है।
गवर्नेंस और ऑपरेशन्स पर नजर
कंपनी पर हाल ही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) ने SEBI के बोर्ड कंपोजिशन नियमों का पालन न करने के कारण जुर्माना लगाया है। यह गवर्नेंस से जुड़ी एक बड़ी चेतावनी है। साथ ही, भारत के हाई-ऐश कोयले को गैस में बदलना एक कठिन और महंगा प्रोसेस है।
28 अगस्त, 2026 तक Coal India का शेयर ₹401.00 पर था, जिसमें 0.25% की मामूली बढ़त देखी गई। अब देखना यह होगा कि क्या कंपनी इन्हीं शर्तों के साथ आगे बढ़ती है या अपने प्रोजेक्ट प्लान में बड़ा बदलाव करती है।
