Coal India Limited ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में पावर सेक्टर को **148.20 मिलियन टन** कोयले की सप्लाई की है, जो पिछले साल के मुकाबले **11%** ज्यादा है। हालांकि, सप्लाई में यह तेजी फेस्टिव सीजन की मांग को तो पूरा कर रही है, लेकिन थर्मल पावर प्लांट्स में अभी भी कोयले का स्टॉक क्रिटिकल लेवल पर बना हुआ है, जिसका सीधा असर कंपनी के मार्जिन पर पड़ सकता है।
सप्लाई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
सरकारी माइनिंग दिग्गज Coal India ने पावर सेक्टर की जरूरत को देखते हुए अपनी लॉजिस्टिक्स रफ्तार बढ़ा दी है। जुलाई से सितंबर के बीच कंपनी ने 148.20 मिलियन टन (MT) कोयला सप्लाई किया, जो पिछले साल इसी दौरान 133.50 MT था। सिर्फ सितंबर महीने में ही कुल सप्लाई में 12.5% की बढ़त देखी गई और 61.20 MT कोयले की डिलीवरी की गई। कंपनी का मुख्य लक्ष्य अपने पिटहेड स्टॉक के 63 MT कोयले को तेजी से खपाना था।
पावर सेक्टर पर भारी दबाव
भारत में बिजली की बढ़ती खपत और बदलते मौसम के मिजाज को देखते हुए Ministry of Power ने Electricity Act की धारा 11 लागू की है। इसके तहत 50 MW से ज्यादा क्षमता वाले सभी कैप्टिव कोयला आधारित पावर प्लांट्स को अक्टूबर से दिसंबर के बीच अधिकतम बिजली उत्पादन का निर्देश दिया गया है। फिलहाल स्थिति यह है कि देश के 190 मॉनिटर किए गए थर्मल प्लांट्स में से 82 प्लांट्स 'क्रिटिकल स्टॉक' लेवल पर काम कर रहे हैं, यानी वहां कोयला भंडार जरूरत का 25% से भी कम है।
मार्जिन पर बढ़ता खर्च
ऑपरेशनल तौर पर सप्लाई बढ़ाना एक अच्छी खबर है, लेकिन कंपनी के फाइनेंशियल मोर्चे पर चुनौतियां बरकरार हैं। वेज रिवीजन और ऊंचे वैधानिक लेवी के कारण कंपनी के मुनाफे के मार्जिन पर दबाव देखा जा रहा है। यही कारण है कि प्रोडक्शन वॉल्यूम बढ़ने के बावजूद इसका सीधा सकारात्मक असर बॉटम लाइन पर नहीं दिख रहा है। निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनी बढ़ते खर्चों के बीच मुनाफे को कैसे बैलेंस करती है।
आगे का रास्ता
Coal India ने पूरे फाइनेंशियल ईयर के लिए 815 MT प्रोडक्शन और 850 MT सप्लाई का लक्ष्य रखा है। हालांकि, इसे हासिल करना मौसम, लॉजिस्टिक्स और ई-ऑक्शन रियलाइजेशन पर निर्भर करेगा। आने वाले महीनों में निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या बढ़ी हुई सप्लाई से पावर प्लांट्स की इन्वेंट्री क्राइसिस कम होती है या नहीं।
