Coal India और AMNS India का बड़ा कदम: ओडिशा में लगेगा कोल गैस‍िफिकेशन प्लांट, एमओयू साइन

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AuthorNeha Patil|Published at:
Coal India और AMNS India का बड़ा कदम: ओडिशा में लगेगा कोल गैस‍िफिकेशन प्लांट, एमओयू साइन

कोल इंडिया (Coal India) और आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (ArcelorMittal Nippon Steel India - AMNS India) ने ओडिशा के पारादीप में एक बड़े कोल गैस‍िफिकेशन प्रोजेक्ट को लेकर नॉन-बाइंडिंग एमओयू (MoU) साइन किया है। इस पहल का मकसद कार्बन कैप्चर टेक्नोलॉजी के साथ सिनगैस (Syngas) का उत्पादन करना है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में अहम साबित हो सकता है।

कोल इंडिया और AMNS India का बड़ा कदम: कोल गैस‍िफिकेशन प्लांट का रास्ता साफ

कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) और आर्सेलर मित्तल निप्पॉन स्टील इंडिया (AMNS India) ने मिलकर एक महत्वपूर्ण कोल गैस‍िफिकेशन प्रोजेक्ट की संभावनाओं को तलाशने के लिए हाथ मिलाया है। दोनों कंपनियों ने 12 अगस्त 2026 को एक नॉन-बाइंडिंग मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस प्रोजेक्ट का फोकस पारादीप, ओडिशा में AMNS के पेलेट प्लांट के पास की जगह पर रहेगा।

शेयर बाजार की प्रतिक्रिया

इस घोषणा के दिन कोल इंडिया के शेयर ₹409.30 पर बंद हुए, जो 0.80% की गिरावट दर्शाता है। यह प्रतिक्रिया बताती है कि बाज़ार इस डेवलपमेंट को शुरुआती दौर का मान रहा है, क्योंकि इस समझौते में कोई तत्काल वित्तीय प्रतिबद्धता शामिल नहीं है।

प्रोजेक्ट का लक्ष्य और टेक्नोलॉजी

इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य कोल गैस‍िफिकेशन टेक्नोलॉजी का उपयोग करके कोयले को सिंथेसिस गैस (सिनगैस) में बदलना है। इस सिनगैस का इस्तेमाल एक क्लीनर इंडस्ट्रियल फ्यूल के तौर पर या केमिकल फीडस्टॉक के रूप में किया जा सकता है। इस साझेदारी की एक खास बात कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन और स्टोरेज (CCUS) टेक्नोलॉजी को इंटीग्रेट करना है। AMNS India के लिए, इस प्रोजेक्ट की सफलता इंपोर्टेड नेचुरल गैस और कोकिंग कोल पर निर्भरता कम कर सकती है, जिनकी कीमतें अक्सर ग्लोबल मार्केट में बहुत ऊपर-नीचे होती रहती हैं।

सरकारी योजनाओं का सपोर्ट

यह पहल कोयले के क्लीनर इस्तेमाल को बढ़ावा देने की भारत सरकार की बड़ी योजना के अनुरूप है। मई 2026 में, यूनियन कैबिनेट ने कोल गैस‍िफिकेशन प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करने के लिए ₹37,500 करोड़ की एक बड़ी इंसेटिव स्कीम को मंजूरी दी थी। देश का लक्ष्य 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले का गैस‍िफिकेशन करना है, ताकि भारत के विशाल घरेलू कोयला भंडार का उपयोग करके ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाया जा सके।

आगे का रास्ता और जोखिम

हालांकि यह साझेदारी विविधीकरण की दिशा में एक रणनीतिक कदम का संकेत देती है, निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि यह समझौता अभी शुरुआती चरण में है। नॉन-बाइंडिंग होने के कारण, यह गारंटी नहीं देता कि प्रोजेक्ट कंस्ट्रक्शन फेज तक पहुंचेगा ही। कोल गैस‍िफिकेशन एक बहुत ही कैपिटल-इंटेंसिव प्रोसेस है, जिसमें टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश की जरूरत होती है। प्लांट की कमर्शियल सफलता प्रीलिमिनरी फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) के नतीजों पर निर्भर करेगी, जो सिनगैस के उत्पादन की टेक्निकल चुनौतियों और लागत-लाभ विश्लेषण का आकलन करेगी।

इसके अलावा, कोल गैस‍िफिकेशन को एक क्लीनर विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन यह अभी भी एक कार्बन-इंटेंसिव इंडस्ट्रियल प्रोसेस है। प्रोजेक्ट के सस्टेनेबिलिटी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए CCUS टेक्नोलॉजी का सफल इंटीग्रेशन बहुत जरूरी होगा। फिजिबिलिटी स्टडी और किसी भी फाइनल इन्वेस्टमेंट एग्रीमेंट पर भविष्य के अपडेट्स शेयरधारकों के लिए महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु होंगे। निवेशक PFR की प्रगति और दोनों कंपनियों के बीच किसी भी निश्चित योजना के बारे में अपडेट के लिए ऑफिशियल एक्सचेंज फाइलिंग पर नज़र रख सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.