रिन्यूएबल एनर्जी का शानदार प्रदर्शन!
यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है जो ग्लोबल एनर्जी प्रोडक्शन में देखा गया है। रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स ने 2025 में वैश्विक बिजली मांग (Global Electricity Demand) में हुई सारी बढ़ोतरी को पूरा किया, जिसके कारण फॉसिल फ्यूल जेनरेशन में कोई वृद्धि नहीं हुई। यह पिछले 100 सालों में पहली बार हुआ है। कुल मिलाकर, रिन्यूएबल्स ने वैश्विक बिजली उत्पादन का 34% हिस्सा हासिल किया, जबकि कोयले का शेयर 33% रहा। इस रिकॉर्ड की मुख्य वजह सोलर जेनरेशन में 636 TWh की ज़बरदस्त उछाल रही, जो पिछले 8 सालों में सबसे तेज 30% की सालाना बढ़ोतरी है। अब सोलर पावर का आउटपुट 2015 की तुलना में 10 गुना से भी ज़्यादा है। विंड पावर ने भी बड़ा योगदान दिया, और सोलर व विंड ने मिलकर मांग में हुई बढ़ोतरी का 99% हिस्सा संभाला। नतीजा यह हुआ कि फॉसिल फ्यूल जेनरेशन में 0.2% की गिरावट आई, और कोयले से बिजली उत्पादन 63 TWh घटकर 2020 के बाद पहली बार नीचे आया। इसमें चीन और भारत जैसे देशों ने अहम भूमिका निभाई।
इन्वेस्टमेंट में रिकॉर्ड उछाल
ऊर्जा बदलाव (Energy Transition) में ग्लोबल इन्वेस्टमेंट 2025 में रिकॉर्ड $2.3 ट्रिलियन तक पहुंच गया, जिसमें से $2.2 ट्रिलियन सीधे क्लीन एनर्जी में लगाया गया।
ग्रिड इंटीग्रेशन की भारी चुनौती
हालांकि, इस सब के बीच, बढ़ती रिन्यूएबल सप्लाई को मौजूदा बिजली ग्रिड (Electricity Grid) से जोड़ना एक बड़ी चुनौती बन गया है। क्षमता की कमी (Insufficient Capacity) और स्टेबिलिटी (Stability) से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। अकेले अमेरिका और यूरोप में 1,000 GW से ज़्यादा सोलर और 500 GW से ज़्यादा विंड प्रोजेक्ट्स इंटरकनेक्शन का इंतज़ार कर रहे हैं। सोलर और विंड पावर की नेचर वेरिएबल (Variable) होती है, यानी ये हमेशा एक जैसी बिजली नहीं दे सकतीं। इनकी इनर्टिया (Inertia) पारंपरिक प्लांट्स जितनी नहीं होती, जिससे ग्रिड में वोल्टेज और फ्रीक्वेंसी की अस्थिरता (Instability) बढ़ सकती है। इस कमी को पूरा करने के लिए एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके 2026 में 30% बढ़ने का अनुमान है।
हाइड्रो पावर में ठहराव और रेगुलेटरी बदलाव
दूसरी ओर, एक भरोसेमंद क्लीन एनर्जी सोर्स हाइड्रो पावर (Hydropower) की ग्लोबल ग्रोथ 2025 में ठहर गई, यह सिर्फ़ 3 TWh ही बढ़ी। इस ठहराव के पीछे मौसम की दिक्कतें भी हैं, जो इसकी मौसम पर निर्भरता को उजागर करती हैं और ग्रिड को बैलेंस करने की इसकी क्षमता को सीमित करती हैं। रेगुलेटरी (Regulatory) लेवल पर भी बदलाव आ रहे हैं। जर्मनी 2026 के अंत तक जेनरेशन सब्सिडी से कैपेसिटी और फ्लेक्सिबिलिटी मार्केट्स की ओर बढ़ रहा है, जबकि EU बैटरी रेगुलेशन 2026 से औद्योगिक बैटरियों के लिए सख्त नियम लागू करेगा।
भविष्य की मांग और ट्रांज़िशन की जटिलताएं
रिन्यूएबल एनर्जी की यह तेज, लेकिन असमान ग्रोथ सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर रही है। सोलर और विंड की वेरिएबल नेचर को अपनाने में ग्रिड की धीमी गति एक बड़ी समस्या है। 1,000 GW से ज़्यादा रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स के ग्रिड कनेक्शन का इंतज़ार है, और क्षमता की सीमाएं एक बड़ा बैरियर हैं। रिन्यूएबल सोर्स से कम इनर्टिया ग्रिड की स्थिरता के लिए जोखिम पैदा करती है। बढ़ती ग्लोबल एनर्जी डिमांड, जिसमें AI इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरतें भी शामिल हैं, बिजली ग्रिड पर और दबाव डालेगी। विश्लेषक (Analysts) एनर्जी ट्रांज़िशन में मजबूत निवेश का अनुमान लगा रहे हैं, लेकिन फोकस अब ग्रिड अपग्रेड, एनर्जी स्टोरेज और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर शिफ्ट हो रहा है। सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ़ क्लीन पावर कैपेसिटी बढ़ाना नहीं, बल्कि इसे एक बदलते सिस्टम में भरोसेमंद और किफायती तरीके से जोड़ना है। एशिया जैसे इलाकों में अभी भी कोयले का इस्तेमाल दिखाता है कि यह ट्रांज़िशन कितना असमान है और जब रिन्यूएबल सोर्स काम नहीं कर रहे हों, तो भरोसेमंद बिजली स्रोतों की ज़रूरत बनी हुई है।
