मिडिल ईस्ट टेंशन और सप्लाई का संकट
इस बड़ी गिरावट की मुख्य वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और ईरान से जुड़ी खबरें हैं, जिसने वैश्विक एनर्जी सप्लाई पर गहरी चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के प्रमुख LNG सप्लायर कतर ने सप्लाई में 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) घोषित कर दिया है। इसका मतलब है कि कंपनी अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण कॉन्ट्रैक्ट के तहत अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं कर पाएगी। इस खबर से भारत की लगभग 40% नेचुरल गैस सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है।
शेयर बाजार में मची अफरातफरी
इस खबर का असर शेयर बाजार पर तुरंत देखने को मिला। Mahanagar Gas (MGL) के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर 9% लुढ़ककर ₹1,100.80 पर आ गए, जो उनके 52-हफ्ते के लो ₹1,019 के करीब है। वहीं, Indraprastha Gas (IGL) के शेयर में भी 6% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह ₹157.30 के नए 52-हफ्ते के लो पर पहुंच गया।
क्यों हैं इतनी चिंताएं?
ईरान की ओर से ड्रोन हमले और जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बढ़ा तनाव एनर्जी ट्रेड के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया भर की लगभग 20% LNG सप्लाई इसी रास्ते से होकर गुजरती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 40-50% LNG कतर से आयात करता है, जो इस जलडमरूमध्य से होकर ही आता है। ऐसे में सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट भारत की एनर्जी सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकती है।
एक्सपर्ट्स की राय और आगे का रास्ता
Kotak Securities और Icra जैसी ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि इस स्थिति से CGD कंपनियों के लिए इनपुट गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं, सप्लाई में कटौती हो सकती है और उनके प्रॉफिट मार्जिन पर भी भारी दबाव आ सकता है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि MGL और IGL जैसी कंपनियों के शेयर अभी भी आकर्षक वैल्यूएशन पर हैं। MGL का पी/ई रेश्यो लगभग 11.3x और मार्केट कैप करीब ₹10,954 करोड़ है, जबकि IGL का पी/ई रेश्यो करीब 14.4x और मार्केट कैप ₹24,122 करोड़ है।
Wall Street के कई एनालिस्ट्स का मानना है कि MGL के लिए टारगेट प्राइस ₹1,355.83 (लगभग 12% अपसाइड) और IGL के लिए ₹211.66 (लगभग 27% अपसाइड) तक जा सकता है। लेकिन, यह मौजूदा भू-राजनीतिक जोखिमों और LNG इंपोर्ट की बढ़ती लागतों को पूरी तरह से नहीं दर्शाता है।
