चीन ने सोलर मैन्युफैक्चरिंग की एडवांस्ड मशीनों के एक्सपोर्ट पर नए प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव दिया है। इससे भारत के लिए **2028** तक डोमेस्टिक सोलर इंजट (ingot) और वेफर (wafer) बनाने का लक्ष्य पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
इंजट (Ingot) उत्पादन की मुश्किल राह
चीन के कॉमर्स मिनिस्ट्री ने सोलर मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाली 12 एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर कंट्रोल लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसका सबसे बड़ा असर सोलर वेफर्स के लिए आधार माने जाने वाले 'इंजट' की मशीनों पर पड़ेगा। मौजूदा सोलर मॉड्यूल्स पर तुरंत कोई खतरा नहीं है, लेकिन अगली पीढ़ी की मशीनरी की सप्लाई अटकने से भारतीय कंपनियों के लिए दिक्कत बढ़ सकती है, क्योंकि ग्लोबल मार्केट में चीन के बाहर इन मशीनों का विकल्प बहुत कम है।
2028 के टारगेट पर तलवार
भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी (MNRE) के मुताबिक, फरवरी 2028 से सोलर प्रोजेक्ट्स के लिए स्वदेशी इंजट और वेफर्स का इस्तेमाल अनिवार्य है। इन एक्सपोर्ट नियमों के कारण कंपनियों को अब जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और अमेरिका जैसे देशों से पार्टनरशिप तलाशनी पड़ सकती है, जिससे कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ने और प्रोजेक्ट्स में देरी होने की आशंका है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों को अब वर्टिकल इंटीग्रेशन (Vertical Integration) करने वाली कंपनियों पर नजर रखनी होगी। यदि मशीनरी महंगी हुई या उपलब्ध नहीं हुई, तो कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि क्या भारतीय कंपनियां चीन के बाहर बेहतर टेक्नोलॉजी पार्टनर ढूंढ पाती हैं या उन्हें अपने एक्सपेंशन प्लान में बदलाव करना पड़ता है।
