चीन ने सोलर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी **12** महत्वपूर्ण तकनीकों पर सख्त एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाने का प्रस्ताव रखा है। सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए लिया गया यह फैसला भारत के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि भारत सोलर वेफर्स और सेल्स के लिए काफी हद तक चीनी इंपोर्ट पर निर्भर है।
चीन की नई चाल
चीन के कॉमर्स मिनिस्ट्री ने सोलर इक्विपमेंट बनाने वाली 12 अहम तकनीकों पर एक्सपोर्ट कंट्रोल लगाने की तैयारी कर ली है। इसमें थिन सोलर वेफर्स, पेरोव्स्काइट सेल्स और हाई-एफिशिएंसी टैंडम सेल्स जैसी महत्वपूर्ण तकनीकें शामिल हैं। बीजिंग का मानना है कि इन पर नियंत्रण करने से उनकी बौद्धिक संपदा (IP) और ग्लोबल सप्लाई चेन पर पकड़ मजबूत होगी।
भारतीय कंपनियों के लिए चुनौतियां
भारत सरकार का Production Linked Incentive (PLI) स्कीम के जरिए सोलर हब बनने का सपना इस फैसले से प्रभावित हो सकता है। फिलहाल, भारत अपनी जरूरत के लिए पॉलीसिलिकॉन और हाई-एफिशिएंसी वेफर्स के लिए चीन पर काफी ज्यादा निर्भर है।
अगर ये पाबंदियां लागू होती हैं, तो:
- Procurement Cost: कच्चे माल और मशीनों की खरीद महंगी हो सकती है, जिससे कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा।
- Technology Access: TOPCon और HJT जैसी आधुनिक निर्माण तकनीकें हासिल करना कठिन हो सकता है। इससे सोलर मॉड्यूल्स का प्रोडक्शन और नई लाइनों का कमीशनिंग समय पर होना मुश्किल होगा।
निवेशकों के लिए चेतावनी
ये नए नियम अभी कंसल्टेशन फेज में हैं, जो नवंबर 2026 के मध्य तक चलेंगे। इस अनिश्चितता के बीच, निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखनी चाहिए जो अपने सप्लाई चेन को डाइवर्सिफाई करने की कोशिश कर रही हैं। यह देखना जरूरी होगा कि कंपनियां बढ़ते लागत दबाव (Cost Inflation) और रॉ मटेरियल की उपलब्धता के संकट को कैसे मैनेज करती हैं।
