चीनी वैज्ञानिकों ने 'PhosCage' नामक एक नए मटेरियल का आविष्कार किया है, जो समुद्र के पानी से यूरेनियम निकालने में काफी सक्षम है। हालांकि, यह तकनीक अभी केवल शुरुआती रिसर्च के स्तर पर है और किसी भी लिस्टेड कंपनी से इसका कोई लेना-देना नहीं है।
चीन के 'चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज' ने 'PhosCage' तकनीक का अनावरण किया है। इसका उद्देश्य महासागरों में घुले हुए 4.5 अरब टन यूरेनियम भंडार को सुरक्षित तरीके से निकालना है, ताकि परमाणु ऊर्जा के लिए जमीन पर आधारित खनन पर निर्भरता कम हो सके।
क्षमता में जबरदस्त सुधार
लैब टेस्ट में इस मटेरियल ने शानदार परिणाम दिए हैं। PhosCage की यूरेनियम सोखने की क्षमता 50.4 मिलीग्राम प्रति ग्राम (mg/g) दर्ज की गई है, जो अमेरिकी ऊर्जा विभाग के बेंचमार्क से 8 गुना से भी अधिक है। रिसर्चर्स ने इसके लिए 'AC-POC' नामक एक विशेष एयरोजेल बीड विकसित किया है, जो समुद्र के खारे और कठोर वातावरण में भी काम कर सकता है।
निवेशकों के लिए चेतावनी
शेयर बाजार के निवेशकों को यह स्पष्ट समझना होगा कि यह एक शैक्षणिक उपलब्धि है, न कि किसी कॉर्पोरेट कंपनी का प्रोडक्ट लॉन्च। इस रिसर्च का शेयर बाजार की किसी भी कंपनी से कोई सीधा संबंध नहीं है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि 'The Phosphate Company' या इसी तरह के मिलते-जुलते नाम वाली कंपनियों को इससे जोड़कर गलत निवेश का निर्णय न लें। यह खबर फिलहाल किसी स्टॉक की फंडामेंटल ग्रोथ से नहीं जुड़ी है।
कमर्शियल सफलता की चुनौतियां
समुद्र में यूरेनियम की सांद्रता बहुत कम, लगभग 3.3 पार्ट्स प्रति बिलियन है, जिससे इसकी लागत जमीन से निकलने वाले यूरेनियम से काफी अधिक बैठती है। इस तकनीक को बड़े स्तर पर उतारने के लिए इसे तीन मुख्य बाधाएं पार करनी होंगी:
- ऑपरेशनल खर्चों को बाजार दर के प्रतिस्पर्धी बनाना।
- समुद्र की गंदगी (biofouling) से मटेरियल को बचाना।
- बड़े पैमाने पर प्लांट लगाने के लिए इसे स्केलेबल बनाना।
अभी यह तकनीक रिसर्च के शुरुआती दौर में है, इसलिए इसका मौजूदा कमोडिटी बाजार या परमाणु ऊर्जा सप्लाई चेन पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
