चीन अपने ऑयल बाइंग पावर का इस्तेमाल कर ईरान पर हुथी (Houthi) हमलों को रोकने का दबाव बना रहा है। भारतीय निवेशकों के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि रेड सी (Red Sea) में किसी भी तरह की हलचल से फ्रेट कॉस्ट, इंश्योरेंस प्रीमियम और कच्चे तेल के दाम बढ़ सकते हैं।
चीन का दबाव और एनर्जी सिक्योरिटी
चीन ने रेड सी में हो रहे हुथी हमलों को कम करने के लिए ईरान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। चीन दुनिया में ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, जिसने 2025 में ईरान के समुद्री कच्चे तेल निर्यात का 80% से अधिक हिस्सा खरीदा है। इसी आर्थिक दबदबे का इस्तेमाल कर बीजिंग अब क्षेत्रीय स्थिरता की वकालत कर रहा है।
भारतीय निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?
भारत अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात पर निर्भर है। रेड सी या स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास शिपिंग रूट में कोई भी बाधा सीधे तौर पर फ्रेट कॉस्ट और टैंकरों के लिए इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ा देती है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ता है, जिसका सीधा असर भारतीय कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन और महंगाई पर पड़ सकता है।
कूटनीति में बदलाव
अमेरिका के यमन में सीधे सैन्य हस्तक्षेप से हटने के बाद, चीन अब एक मध्यस्थ (Mediator) के रूप में अपनी भूमिका देख रहा है। 2023 में ईरान और सऊदी अरब के बीच राजनयिक संबंध बहाल कराने के बाद, अब बीजिंग चुपचाप तेहरान को संदेश दे रहा है कि अस्थिरता से ईरान के अपने आर्थिक ढांचे को भी खतरा है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि यह दबाव कितना असरदार साबित होगा, क्योंकि मिलिटेंट ग्रुप अक्सर अपनी मर्जी से काम करते हैं। निवेशकों को अब ग्लोबल क्रूड ऑयल प्राइस ट्रेंड्स पर नजर रखने की जरूरत है।
