चीन ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए नए अप्रूवल पर अस्थायी रोक लगा दी है। बाजार में छाई सुस्ती और ओवरकैपेसिटी को कंट्रोल करने के लिए चीन सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।
चीन ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए नई मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज को मंजूरी देना फिलहाल बंद कर दिया है। बीजिंग का यह कदम इंडस्ट्रियल कंसोलिडेशन और बेहतर दक्षता की तरफ एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, ताकि बाजार में मौजूद भारी प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित किया जा सके।
इंडस्ट्रियल ओवरकैपेसिटी और नए नियम
सेक्टर में सुस्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2026 की पहली छमाही में चीन में नई बैटरी स्टोरेज क्षमता में पिछले साल के मुकाबले 18% की गिरावट आई है। अब सरकार ने कई नियामक (Regulatory) कदम उठाए हैं:
- कंजम्पशन टैक्स: लिथियम-आयन और अन्य बैटरी टेक्नोलॉजी पर सितंबर 2026 से टैक्स लागू हो गया है, जो 2% से शुरू होकर सितंबर 2027 तक 4% तक पहुंच जाएगा।
- सख्त मानक: 1 जनवरी 2027 से बैटरी और फोटोवोल्टिक वैल्यू चेन के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता मानक अनिवार्य हो जाएंगे।
इन फैसलों का सीधा मकसद उन छोटी और कम कुशल कंपनियों को बाहर करना है, जो सब्सिडी या आक्रामक विस्तार के सहारे चल रही थीं।
ग्लोबल मार्केट पर असर
ग्लोबल सप्लाई चेन में चीन का दबदबा है, इसलिए नई फैक्ट्रियों पर लगी यह रोक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए चिंता का विषय बन सकती है। अगर नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स पर रोक जारी रहती है, तो सप्लाई चेन में अड़चनें आ सकती हैं। इसके अलावा, नए टैक्स और क्वालिटी-फोर्स्ड प्रोडक्शन से ग्लोबल बैटरी की कीमतों में उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि कंपनियां इन नए मानकों के साथ कितनी जल्दी तालमेल बिठाती हैं और क्या इसका बोझ ग्लोबल ग्राहकों पर पड़ेगा या नहीं।
