नेपाल के Chilime Hydropower प्रोजेक्ट में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय और नेपाली टीमों ने टनल से **70 मीटर** मलबा हटा लिया है। **26 अगस्त** को आए बर्फीले एवलांच के बाद से 6 कर्मचारी लापता हैं, और यह घटना हिमालयी क्षेत्र के पावर प्रोजेक्ट्स के लिए बड़े वित्तीय और ऑपरेशनल रिस्क को उजागर करती है।
रेस्क्यू ऑपरेशन की मौजूदा स्थिति
13 सितंबर, 2026 तक, भारतीय और नेपाली बचाव कर्मियों की संयुक्त टीम ने टनल के अंदर से लगभग 70 मीटर मलबा हटा दिया है। अंडरग्राउंड पावरहाउस तक पहुंचने के लिए अभी भी 60 मीटर का हिस्सा साफ करना बाकी है। माना जा रहा है कि 26 अगस्त को आए भयानक बर्फ और चट्टानों के एवलांच के बाद से 6 कर्मचारी वहीं फंसे हुए हैं।
लॉजिस्टिक चुनौतियां
इस ऑपरेशन में भारी मशीनरी को टनल के भीतर तक ले जाना एक बड़ी चुनौती है। इसे मुमकिन बनाने के लिए Border Roads Organisation (BRO) ने रास्तों को मजबूत किया है, जबकि Nepal Army ने स्याफ्रुबेसी (Syafrubesi) इलाके में 1 किलोमीटर से ज्यादा लंबी नई एक्सेस रोड तैयार की है। एवलांच और बाढ़ के कारण पुराने पुल और सड़कें पूरी तरह तबाह हो चुकी थीं, जिसके बिना भारी उपकरणों को लाना असंभव था।
हाइड्रोपावर सेक्टर के लिए बड़ा जोखिम
भले ही Chilime Hydropower Company Limited भारतीय शेयर बाजार (NSE/BSE) में लिस्टेड नहीं है, लेकिन यह आपदा हिमालयी बेल्ट में चल रहे पावर प्रोजेक्ट्स की असुरक्षा को आईना दिखाती है। भोतेकोशी (Bhotekoshi) नदी के आसपास के इलाकों में एक दर्जन से ज्यादा टनल सिस्टम को नुकसान पहुंचा है। ऐसी घटनाओं से कंपनियों पर भारी मरम्मत का खर्च, लंबे समय तक प्रोडक्शन बंद रहने का संकट और एसेट वैल्यूएशन में बड़ी गिरावट का खतरा मंडराने लगता है।
फिलहाल निवेशकों की नजरें नुकसान की औपचारिक रिपोर्ट और बहाली की समय-सीमा पर टिकी हैं। रेस्क्यू के बाद यह साफ हो पाएगा कि बुनियादी ढांचे को कितना नुकसान पहुंचा है और रिकवरी में कितना समय लगेगा।
