छत्तीसगढ़ सरकार ने अगले 5 वर्षों के लिए ₹5.6 लाख करोड़ के बड़े निवेश का रोडमैप तैयार किया है। इस प्लान का मुख्य उद्देश्य थर्मल पावर के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी पर जोर देना है, जिसमें 2030 तक 15,000 MW रिन्यूएबल क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट और एक्सपो 2026 के दौरान अपनी महत्वाकांक्षी एनर्जी नीति का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जानकारी दी कि राज्य अगले पांच वर्षों में ₹5.6 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करेगा, जो राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए थर्मल और ग्रीन एनर्जी का एक संतुलित मिश्रण होगा।
निवेश का बंटवारा (Investment Breakdown)
सरकार ने अपनी रणनीति को कई हिस्सों में बांटा है:
- थर्मल पावर: राज्य ने थर्मल पावर विस्तार के लिए ₹3.27 लाख करोड़ रखे हैं, क्योंकि औद्योगिक बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कोयला अभी भी आधार बना रहेगा।
- रिन्यूएबल एनर्जी: ग्रीन एनर्जी के योगदान को वर्तमान के 15% से बढ़ाकर 45% से ऊपर ले जाने का लक्ष्य है। इसके लिए ₹1.33 लाख करोड़ का फंड आवंटित किया गया है, जिसका लक्ष्य 15,000 MW की क्षमता हासिल करना है।
- स्टोरेज सॉल्यूशंस: पावर ग्रिड को स्टेबल रखने के लिए ₹65,000 करोड़ पंप-हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स (क्षमता 12,300 MW) और 10,000 MWh की बैटरी स्टोरेज पर खर्च किए जाएंगे।
- अन्य पहल: राज्य परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy) में 4,200 MW क्षमता बढ़ाने और बायो-इकोनॉमी में ₹6,000 करोड़ का निवेश लाने पर भी विचार कर रहा है।
निवेशकों के लिए अहम संकेत
इतने बड़े स्तर के प्रोजेक्ट्स में पूंजी की भारी जरूरत होती है और इनका गेस्टेशन पीरियड (काम पूरा होने का समय) लंबा होता है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इस रोडमैप की सफलता पूरी तरह से जमीन अधिग्रहण, सरकारी क्लीयरेंस और प्राइवेट सेक्टर के सहयोग पर निर्भर करेगी। फिलहाल, निवेशकों के लिए आने वाले समय में इन प्रोजेक्ट्स से जुड़े टेंडर्स और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर नजर रखना फायदेमंद साबित हो सकता है।
