Chennai Petroleum Corporation (CPCL) अपने **9 मिलियन टन** क्षमता वाले नागपट्टिनम रिफाइनरी प्रोजेक्ट का नक्शा बदल रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों के दौर में ईंधन की घटती मांग को देखते हुए कंपनी अब इसे पेट्रोकेमिकल्स पर फोकस करने वाली यूनिट में बदल रही है।
प्रोजेक्ट का बदला स्वरूप
CPCL ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी अब नागपट्टिनम में पारंपरिक पेट्रोल-डीजल के बजाय पेट्रोकेमिकल्स आधारित कॉम्प्लेक्स तैयार कर रही है। यह जॉइंट वेंचर, जिसका नाम 'Cauvery Basin Refinery and Petrochemicals Limited (CBRPL)' है, अब अधिक मार्जिन वाले प्रोडक्ट्स पर ध्यान देगा। इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के बढ़ते चलन के बीच यह कंपनी का एक दूरगामी कदम है ताकि भविष्य में ईंधन की मांग में होने वाली कमी से बचा जा सके।
मनाली रिफाइनरी का दम
कंपनी की मौजूदा मनाली रिफाइनरी शानदार प्रदर्शन कर रही है। पिछले 5 सालों से यह 100% से ज्यादा कैपेसिटी पर काम कर रही है। इसकी सबसे बड़ी ताकत 160 से अधिक तरह के क्रूड ऑयल को प्रोसेस करने की क्षमता है। इससे कंपनी ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में बाधा के बावजूद सस्ता क्रूड हासिल करने में सफल रहती है।
क्या है आगे का लक्ष्य?
मुनाफा बढ़ाने के लिए कंपनी मनाली प्लांट में भी बदलाव कर रही है। अब वहां Group I के बजाय बेहतर क्वालिटी वाले Group II और Group III ल्यूब ऑयल बेस स्टॉक बनाए जाएंगे। साथ ही, पैरेंट कंपनी 'Indian Oil Corporation Ltd' के साथ तालमेल बिठाते हुए CPCL ने 2046 तक नेट-जीरो लक्ष्य का रोडमैप भी तैयार किया है। निवेशकों को अब इस प्रोजेक्ट की समयसीमा और कंपनी पर पड़ने वाले कैपिटल खर्च के बोझ पर नज़र रखनी होगी।
