CESC की सब्सिडियरी Purvah Green Power ने मध्य प्रदेश में **49.5 MW** का विंड एनर्जी प्लांट लगाने के लिए Prism Johnson के साथ करार किया है।
RP-संजीव गोयनका ग्रुप की रिन्यूएबल एनर्जी आर्म, Purvah Green Power ने मध्य प्रदेश में 49.5 MW का विंड पावर प्रोजेक्ट विकसित करने का एग्रीमेंट साइन किया है। इस प्रोजेक्ट को कंपनी की सब्सिडियरी KUS Renewable Private Limited द्वारा मैनेज किया जाएगा और यह अगले 25 सालों तक Prism Johnson को बिजली की सप्लाई करेगा। यह कदम ग्रुप की रिन्यूएबल एनर्जी में पैठ जमाने की बड़ी रणनीति का हिस्सा है।
ग्रुप कैप्टिव मॉडल क्या है?
यह प्रोजेक्ट 'ग्रुप कैप्टिव मॉडल' के तहत तैयार किया जा रहा है। इसमें सीमेंट मैन्युफैक्चरर जैसी कंपनियां पावर प्रोजेक्ट में इक्विटी स्टेक लेती हैं, जिससे उन्हें ग्रिड के मुकाबले सस्ती बिजली मिलती है। सीमेंट जैसी इंडस्ट्रीज में एनर्जी कॉस्ट एक बड़ा खर्च है, इसलिए इस मॉडल से कंपनी को ऑपरेशनल कॉस्ट कम करने और सस्टेनेबिलिटी स्कोर सुधारने में मदद मिलेगी।
CESC के लिए क्या मायने हैं?
यह डील CESC की बिजनेस स्ट्रेटजी में एक बड़े बदलाव को दर्शाती है। कंपनी अपने पारंपरिक पावर डिस्ट्रीब्यूशन बिजनेस के साथ-साथ अब बड़े कॉरपोरेट क्लाइंट्स के लिए रिन्यूएबल एसेट भी तैयार कर रही है, जिससे उन्हें लंबे समय तक स्टेबल रेवेन्यू मिलता रहेगा।
रिस्क फैक्टर और चुनौतियां
हालांकि, इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2028 के शुरुआती महीनों में होनी है। प्रोजेक्ट की सफलता जमीन अधिग्रहण, सरकारी क्लीयरेंस और ग्रिड कनेक्टिविटी जैसे फैक्टर्स पर टिकी है। इसके अलावा, भारत में रिन्यूएबल सेक्टर सरकारी नीतियों और टैक्स इंसेंटिव्स में बदलाव के प्रति संवेदनशील है, जिसका असर प्रोजेक्ट की इकोनॉमिक वायबिलिटी पर पड़ सकता है। निवेशकों को आने वाले सालों में प्रोजेक्ट के निर्माण और कंप्लायंस पर नजर रखनी चाहिए।
