CESC ने अपनी सहायक कंपनी Purvah Green Power के ज़रिए ReNew से **1.4 GWp** का सोलर पोर्टफोलियो **₹4,859 करोड़** में खरीदने का एग्रीमेंट किया है। इस डील से कंपनी की कुल रिन्यूएबल कैपेसिटी बढ़कर **4.8 GWp** हो गई है, जो **10 GWp** के लक्ष्य की ओर एक अहम कदम है। निवेशक अब इस बड़े विस्तार के कंपनी के डेट और प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ने वाले असर पर नज़रें गड़ाए हुए हैं।
CESC लिमिटेड रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। कंपनी ने ReNew से 1.4 गीगावाट-पीक (GWp) का ऑपरेशनल सोलर पोर्टफोलियो ₹4,859 करोड़ के एंटरप्राइज वैल्यू पर खरीदने का ऐलान किया है। यह डील 10 अगस्त, 2026 को कंपनी द्वारा बताई गई। यह कदम CESC की थर्मल पावर पर निर्भरता कम करने और ग्रीन एनर्जी प्लेटफॉर्म बनाने की रणनीति का एक अहम हिस्सा है। अपनी सहायक कंपनी Purvah Green Power के ज़रिए, CESC अब कुल 4.8 GWp की कॉन्ट्रैक्टेड कैपेसिटी का प्रबंधन कर रही है, जिसमें 1.8 GWp के ऑपरेशनल एसेट्स और 3 GWp क्षमता के प्रोजेक्ट्स अंडर कंस्ट्रक्शन शामिल हैं।
यह एक्वायर किया गया सोलर पोर्टफोलियो ज्यादातर 25 साल के लॉन्ग-टर्म पावर परचेज एग्रीमेंट्स (PPAs) पर आधारित है। इन PPAs को SECI और कर्नाटक डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों जैसी सरकारी एजेंसियों के साथ साइन किया गया है। सिर्फ मौजूदा कैपेसिटी खरीदने के अलावा, CESC सोलर सेल और मॉड्यूल मैन्युफैक्चरिंग में भी उतरने की तैयारी कर रही है। वर्टिकल इंटीग्रेशन का यह कदम सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए है, क्योंकि कंपनी का लक्ष्य आने वाले सालों में 10 GWp की विशाल रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी हासिल करना है। यह स्ट्रेटेजी CESC को JSW Energy और Tata Power जैसे अपने पीयर्स के बिजनेस मॉडल के करीब लाती है, जिन्होंने निवेशकों को आकर्षित करने के लिए आक्रामक ग्रीन कैपेसिटी विस्तार पर ज़ोर दिया है।
हालांकि, यह विस्तार ग्रोथ के संकेत तो देता है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी सामने लाता है। कंपनी के Q1 FY27 के नतीजे, जो 13 अगस्त, 2026 को आए थे, उनमें ₹402 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट और ₹5,485 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया गया। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में क्रमशः 3.1% और 5.4% की बढ़ोतरी दिखाता है। लेकिन, कंपनी पर प्रॉफिट मार्जिन को लेकर दबाव है, क्योंकि कंसोलिडेटेड EBITDA मार्जिन पिछले साल के 16.6% से थोड़ा घटकर 16.3% हो गया है। निवेशक कंपनी के कैपिटल स्पेंडिंग की ज़रूरतों पर खास ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि इतने बड़े रिन्यूएबल पाइपलाइन को मैनेज करने के लिए भारी वित्तीय खर्च की आवश्यकता होती है। 1.1 के आसपास के कंसोलिडेटेड डेट-टू-इक्विटी रेशियो के साथ, भविष्य में बिना अत्यधिक उधार लिए इन प्रोजेक्ट्स को फंड करने की क्षमता एक अहम फैक्टर साबित होगी।
आगे चलकर, मार्केट इस बात पर नज़र रखेगा कि CESC इन नए एसेट्स को कितनी प्रभावी ढंग से इंटीग्रेट करती है और अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स की एक्ज़ीक्यूशन टाइमलाइन को कैसे मैनेज करती है। कमिश्निंग में कोई भी देरी या इक्विपमेंट प्रोक्योरमेंट में समस्याएं प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं। शेयरहोल्डर्स को यह भी ध्यान देना चाहिए कि कंपनी ने ₹6 प्रति इक्विटी शेयर का अंतरिम डिविडेंड घोषित किया है, जिसकी रिकॉर्ड डेट 19 अगस्त, 2026 तय की गई है। अंडर कंस्ट्रक्शन 3 GWp कैपेसिटी की कमिश्निंग स्टेटस और डेट लेवल में किसी भी बदलाव पर भविष्य के अपडेट्स कंपनी की लॉन्ग-टर्म हेल्थ के लिए महत्वपूर्ण संकेतक होंगे।
