CERC ने Pumped Storage Projects की कमाई बढ़ाने के लिए उन्हें High Price Day-Ahead Market में बिजली बेचने की मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, रेगुलेटरी सपोर्ट के बावजूद Torrent Power जैसे बड़े खिलाड़ियों के लिए मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं, जिसका **3,000 MW** वाला महाराष्ट्र प्रोजेक्ट विरोध के कारण रुका हुआ है।
Central Electricity Regulatory Commission (CERC) ने एक ड्राफ्ट प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत Pumped Storage Projects को बिजली बेचने के लिए High Price Day-Ahead Market तक पहुंच मिलेगी। इस कदम का मकसद लंबी अवधि के एनर्जी स्टोरेज सेक्टर की इकोनॉमिक्स को बेहतर बनाना है। मौजूदा नियमों में जहां प्राइस कैप ₹10 प्रति यूनिट है, वहीं इस बदलाव के बाद ऑपरेटर्स ₹20 प्रति यूनिट तक की कीमत पा सकेंगे, जिससे भारी-भरकम इनवेस्टमेंट की रिकवरी तेजी से हो सकेगी।
Torrent Power के सामने जमीन और पर्यावरण की जंग
रेगुलेटरी सपोर्ट मिलने के बावजूद कंपनियों की ग्राउंड रियलिटी काफी चुनौतीपूर्ण है। Torrent Power का 3,000 MW वाला Saidongar-1 प्रोजेक्ट इसका जीता-जागता उदाहरण है। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब ₹15,000 करोड़ आंकी गई है, लेकिन स्थानीय विरोध और पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण काम रुक गया है।
कंपनी का दावा है कि उसने जनवरी 2026 तक सभी जरूरी क्लीयरेंस हासिल कर लिए थे। स्थानीय लोगों को मनाने के लिए Torrent Power ने 48,000 पेड़ों को काटने के बदले 60,000 नए पेड़ लगाने का वादा किया है। इसके बावजूद, राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर विरोध के चलते साइट का काम रुका हुआ है।
सेक्टर में लागू करने की चुनौतियां
भारत में Pumped Storage की क्षमता 290 GW होने का अनुमान है, लेकिन फिलहाल केवल 7.43 GW ही ऑपरेशनल है। 15.87 GW की क्षमता पाइपलाइन में है। Torrent Power का अनुभव बताता है कि केवल फाइनेंशियल इंसेंटिव से काम नहीं चलेगा; कंपनियों को लैंड-यूज और एनवायरनमेंटल कंप्लायंस के मोर्चे पर भी काफी मशक्कत करनी होगी। निवेशकों के लिए अब मुख्य मॉनिटरेबल यह है कि कंपनियां कैसे इन जमीनी विवादों को सुलझाकर अपने प्रोजेक्ट्स को तय समय में पूरा करती हैं।
