CERC का बड़ा फैसला: रिन्यूएबल एनर्जी को मिली 25 साल की ट्रांसमिशन छूट, NLC इंडिया की सब्सिडियरी ने जीता 900 MW का सोलर प्रोजेक्ट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
CERC का बड़ा फैसला: रिन्यूएबल एनर्जी को मिली 25 साल की ट्रांसमिशन छूट, NLC इंडिया की सब्सिडियरी ने जीता 900 MW का सोलर प्रोजेक्ट

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) ने रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन (ISTS) चार्ज में छूट को प्रोजेक्ट की लाइफसाइकल तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। वहीं, NLC इंडिया की सब्सिडियरी NIRL को GUVNL से 900 MW का सोलर प्रोजेक्ट मिला है।

ट्रांसमिशन चार्ज में बड़ी राहत

सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (CERC) ने 'शेयरिंग ऑफ इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन चार्जेस एंड लॉसेस रेगुलेशंस, 2026' में एक ड्राफ्ट अमेंडमेंट पेश किया है। इस प्रस्ताव के तहत, रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स के साथ इंटीग्रेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम्स के लिए इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन चार्जेस (ISTS) में छूट को बढ़ाया जाएगा। मौजूदा प्रस्ताव के अनुसार, यह 25 साल की छूट रिन्यूएबल प्रोजेक्ट के ऑपरेशनल लाइफ के बराबर होगी, जो डेवलपर्स को बैटरी लाइफ के आधार पर मिलने वाली पुरानी छूट की तुलना में ज़्यादा स्थिरता प्रदान करेगी।

निवेशकों और प्रोजेक्ट्स पर असर

इस बदलाव से स्टोरेज-लिंक्ड रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स की लॉन्ग-टर्म ऑपरेशनल कॉस्ट कम होगी, जिससे ऐसे एसेट्स की फाइनेंशियल वायबिलिटी में सुधार हो सकता है। ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि ग्रीन डे-अहेड मार्केट (G-DAM) से खरीदी गई रिन्यूएबल एनर्जी को उस आवश्यकता के लिए गिना जा सकेगा, जिसके तहत स्टोर की गई कुल एनर्जी का कम से कम 51% सोलर या विंड सोर्स से आना ज़रूरी है। पारदर्शिता के लिए, एनर्जी एक्सचेंज इस मिक्स को सर्टिफाई करने के लिए जिम्मेदार होंगे। इसके अलावा, ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी देरी के कारण प्रोजेक्ट्स में विलंब होने पर उन्हें ISTS छूट मिलती रहेगी, बशर्ते वे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के दो महीने के भीतर ऑपरेशनल हो जाएं।

NLC इंडिया का ग्रोथ प्लान

इन रेगुलेटरी चर्चाओं के बीच, NLC इंडिया की सब्सिडियरी NLC इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (NIRL) को गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (GUVNL) से 900 MW के सोलर पावर प्रोजेक्ट के लिए लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) मिला है। यह प्रोजेक्ट टैरिफ-आधारित कॉम्पिटिटिव बिडिंग प्रक्रिया के ज़रिए हासिल किया गया है। NLC इंडिया का लक्ष्य 2030 तक 10 GW से ज़्यादा रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी हासिल करना है, और यह ऑर्डर इस लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम है। NLC इंडिया रिन्यूएबल्स फिलहाल अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) की तैयारी कर रही है, ऐसे में प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और पोर्टफोलियो ग्रोथ निवेशकों के लिए अहम मॉनिटर करने वाले पहलू होंगे।

सेक्टर का आउटलुक

भारतीय रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी और ग्रिड इंटीग्रेशन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। CERC का पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित करना, खासकर 51% रिन्यूएबल चार्जिंग क्राइटेरिया का कॉन्ट्रैक्ट-वाइज असेसमेंट करने का प्रस्ताव, प्रोजेक्ट्स को किसी एक कॉन्ट्रैक्ट में गैर-अनुपालन के कारण छूट की पात्रता खोने से बचाएगा। NLC इंडिया जैसी कंपनियों के लिए, ये रेगुलेटरी कदम लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट प्लानिंग के लिए एक स्पष्ट फ्रेमवर्क प्रदान करते हैं। निवेशकों को इन रेगुलेशंस की फाइनल नोटिफिकेशन पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि विशिष्ट नियम और शर्तें आने वाली तिमाहियों में प्रमुख रिन्यूएबल एनर्जी प्लेयर्स की प्रॉफिटेबिलिटी और कॉम्पिटिटिव बिडिंग स्ट्रैटेजी को प्रभावित कर सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.