Central Electricity Authority (CEA) ने विदेशी तकनीक पर निर्भरता खत्म करने का रोडमैप तैयार किया है। 2030 तक पावर ग्रिड के मॉनिटरिंग सिस्टम को पूरी तरह स्वदेशी बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जो साइबर सिक्योरिटी के लिहाज से एक बड़ा कदम है।
स्वदेशी तकनीक की ओर कदम
Central Electricity Authority (CEA) ने देश के पावर मैनेजमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए एक बड़ा स्ट्रैटेजिक रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत अब ग्रिड के लिए जरूरी Supervisory Control and Data Acquisition (SCADA) सिस्टम को पूरी तरह से भारत में ही विकसित किया जाएगा। अभी पावर सेक्टर में विदेशी कंपनियों का दबदबा है, जिन्हें अब चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा।
लक्ष्य और नियम (The Roadmap)
मौजूदा समय में पावर ग्रिड में डोमेस्टिक कंटेंट 20% से भी कम है। इस स्थिति को बदलने के लिए 38 सॉफ्टवेयर मॉड्यूल और 25 हार्डवेयर कंपोनेंट्स को 2026-2027 से 2028-2029 के बीच पूरी तरह स्वदेशी बनाया जाएगा। इसके अलावा, 1 अप्रैल 2027 से पावर सेक्टर के लिए नए साइबर सिक्योरिटी रेगुलेशंस लागू करने की तैयारी है, जिससे ग्रिड की सुरक्षा को अभेद्य बनाया जा सके।
बिजनेस और निवेश पर असर
यह बदलाव ऑटोमेशन, साइबर सिक्योरिटी और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ा लॉन्ग-टर्म अवसर खोलता है। हालांकि, राह आसान नहीं है। SCADA सिस्टम की कुल लागत का लगभग 75% हिस्सा हार्डवेयर का होता है, जिसे लोकलाइज करना काफी महंगा और जटिल काम है।
सरकारी सहायता के लिए Power System Development Fund (PSDF) का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए जरूरी फंड मुहैया कराया जा सके। निवेशकों को अब इस मिशन की प्रगति, लोड डिस्पैच सेंटर्स (Load Despatch Centres) में होने वाले पायलट प्रोजेक्ट्स और सरकार की नई प्रोक्योरमेंट पॉलिसी पर पैनी नजर रखनी होगी।
