बढ़ती ग्लोबल क्रूड कीमतों के कारण बल्क डीजल की कीमतें बढ़कर **₹153.57** प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। रिटेल डीजल की कीमतों में बदलाव न होने से अब **₹57.93** का भारी अंतर पैदा हो गया है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ गया है।
देश के फ्यूल मार्केट में इस समय बड़ी हलचल है। बल्क डीजल की कीमतों में ₹14.6 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद अब इसकी कीमत ₹153.57 प्रति लीटर हो गई है। वहीं, दिल्ली में सरकारी तेल कंपनियों के रिटेल आउटलेट्स पर डीजल ₹95.64 प्रति लीटर के पुराने रेट पर ही मिल रहा है।
रिटेल पंपों पर बढ़ रहा दबाव
कीमतों में इस भारी अंतर के कारण अब कमर्शियल फ्लीट ऑपरेटर्स और इंडस्ट्रियल ग्राहक बल्क के बजाय रिटेल पेट्रोल पंपों का रुख कर रहे हैं। इससे रिटेल आउटलेट्स पर अचानक भीड़ बढ़ गई है और फ्यूल सप्लाई चेन पर भारी दबाव देखा जा रहा है। सरकारी तेल कंपनियों के लिए यह दोहरी चुनौती है क्योंकि उन्हें क्रूड ऑयल महंगा खरीदना पड़ रहा है और रिटेल मार्केट में कम मार्जिन पर फ्यूल बेचना पड़ रहा है।
प्राइवेट प्लेयर्स की अलग रणनीति
सरकारी कंपनियों के विपरीत, प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स अपनी बैलेंस शीट संभालने के लिए कदम उठा रहे हैं। Nayara Energy ने पेट्रोल की कीमतों में ₹5 और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की है। इस समय इंटरनेशनल मार्केट में Brent Crude लगभग $102 प्रति बैरल और Indian Basket का क्रूड करीब $117 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
निवेशकों को अगले कुछ हफ्तों में 3 मुख्य बातों पर नजर रखनी चाहिए:
- सरकारी नीति: सरकार द्वारा रिटेल कीमतों में बदलाव के किसी भी फैसले पर नजर रखें, जो मार्जिन डायनामिक्स बदल सकता है।
- क्रूड ऑयल: ग्लोबल क्रूड कीमतों का रुझान ईंधन की लागत को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
- सेल्स वॉल्यूम: सरकारी रिटेल पंपों पर बिक्री के आंकड़ों से यह पता चलेगा कि कमर्शियल शिफ्ट का उनकी प्रॉफिटेबिलिटी पर कितना बड़ा असर पड़ रहा है।
