ईरान के **5** ऑयल टैंकरों को अमेरिकी सेना द्वारा नष्ट किए जाने के बाद क्रूड ऑयल की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। Brent crude का दाम **$99.49** प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जो भारतीय निवेशकों के लिए चिंता का सबब बन सकता है।
गल्फ ऑफ ओमान में हुई सैन्य कार्रवाई के बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है। 8 सितंबर को अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के 5 ऑयल टैंकरों को नष्ट करने के बाद Brent crude फ्यूचर्स में तेजी का रुख है और यह $100 प्रति बैरल के स्तर को छूने की तैयारी में है। यह कदम ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों पर किए गए मिसाइल हमलों का जवाब माना जा रहा है।\n\n### भारतीय बाजार पर इसका असर\n\nभारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85% से अधिक आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत के ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) पर पड़ता है। रुपये की कमजोरी के साथ यह स्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है।\n\n### सेक्टर पर क्या असर होगा?\n\n* OMCs (Bharat Petroleum, Hindustan Petroleum, Indian Oil Corporation): जब कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इन कंपनियों के मार्जिन पर भारी दबाव पड़ता है। अगर कंपनियां ग्राहकों पर कीमतों का पूरा बोझ नहीं डाल पाती हैं, तो उनके मुनाफे में गिरावट तय है।\n\n* अपस्ट्रीम कंपनियां (ONGC, Oil India): इन कंपनियों के लिए स्थिति थोड़ी अलग होती है। ग्लोबल कीमतों में उछाल से इन्हें अपने उत्पादन के लिए बेहतर दाम मिल सकते हैं, जो इनके रिवेन्यू के लिए सकारात्मक हो सकता है, बशर्ते सरकार की टैक्स नीतियां अनुकूल रहें।\n\n* अन्य सेक्टर: एयरलाइंस, पेंट कंपनियां और केमिकल मैन्युफैक्चरर्स के लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ना तय है, क्योंकि ये कंपनियां सीधे तेल डेरिवेटिव्स पर निर्भर हैं।\n\nबाजार की नजर अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर है, जो वैश्विक आपूर्ति के लिए एक प्रमुख 'चोकपॉइंट' है। निवेशकों को आने वाले दिनों में Brent crude की कीमतों, रुपये की चाल और सरकार की फ्यूल सब्सिडी पॉलिसी पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
