Breakthrough Energy: बिल गेट्स की कंपनी ने **21** स्टार्टअप्स पर लगाया दांव, एनर्जी सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Breakthrough Energy: बिल गेट्स की कंपनी ने **21** स्टार्टअप्स पर लगाया दांव, एनर्जी सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी

बिल गेट्स द्वारा स्थापित Breakthrough Energy Ventures ने **21** नए स्टार्टअप्स को फंडिंग दी है। यह निवेश मुख्य रूप से न्यूक्लियर फ्यूजन और हाइड्रोजन जैसी भविष्य की तकनीकों पर केंद्रित है। कंपनी ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में ग्लोबल बिजली की मांग **3 गुना** तक बढ़ सकती है।

बिल गेट्स की निवेश फर्म Breakthrough Energy Ventures ने अपने छठे चरण के फंडिंग राउंड में 21 अर्ली-स्टेज स्टार्टअप्स को चुना है। ये कंपनियां न्यूक्लियर फ्यूजन, हाइड्रोजन ट्रांसपोर्ट, सेमीकंडक्टर एफिशिएंसी और प्रिसिजन एग्रीकल्चर जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं। फर्म के मैनेजिंग पार्टनर एरिक टून के अनुसार, डेटा सेंटर्स की बढ़ती पावर जरूरतें तो सिर्फ एक शुरुआत हैं। जैसे-जैसे वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ेंगी, बिजली की मांग 3 गुना तक बढ़ सकती है, जो मौजूदा पावर ग्रिड के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

इंफ्रास्ट्रक्चर और एडॉप्टेशन पर बड़ा दांव

इस बार की फंडिंग में भारी इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लाइमेट रेजिलिएंस को प्राथमिकता दी गई है। इनमें Borealis Fusion शामिल है, जो प्रोटॉन-बोरोन फ्यूल पर रिसर्च कर रही है ताकि फ्यूजन एनर्जी की लागत कम हो सके। वहीं, StarWarden रिएक्टर्स के लिए थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम तैयार कर रही है। हाइड्रोजन सेक्टर में, AmyHyTech और Ammovolt Energy जैसी कंपनियां अमोनिया को डिस्ट्रीब्यूशन के लिए एक वाहक के तौर पर इस्तेमाल करने पर काम कर रही हैं, ताकि हाइड्रोजन को आसानी से पहुंचाया जा सके।

इसके अलावा, फर्म अब क्लाइमेट एडॉप्टेशन पर भी फोकस कर रही है, जिसमें मिनरल एक्सट्रैक्शन रोबोटिक्स और फसल रोग पहचान जैसी तकनीकें शामिल हैं। यह संकेत देता है कि निवेशक अब सिर्फ उत्सर्जन कम करने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वे ग्लोबल वार्मिंग से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचने की तैयारी कर रहे हैं।

रिस्क और चुनौतियां

निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि इनमें से कई तकनीकें, जैसे कि प्रोटॉन-बोरोन फ्यूजन, अभी प्रयोग के दौर (Experimental stage) में हैं। इन्हें कमर्शियल तौर पर सफल होने में काफी लंबा समय और भारी कैपिटल की जरूरत होगी। डीप-टेक निवेश में अक्सर डेवलपमेंट की लागत और रेगुलेटरी बाधाएं एक बड़ी चुनौती होती हैं। अंत में, इन स्टार्टअप्स की कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या वे मौजूदा जीवाश्म ईंधन या रिन्यूएबल एनर्जी की तुलना में सस्ती बिजली पैदा कर पाते हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.