BPCL कच्चे तेल की खरीद में कर रहा बड़े बदलाव, ईरान संकट से सप्लाई पर असर

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AuthorAditya Rao|Published at:
BPCL कच्चे तेल की खरीद में कर रहा बड़े बदलाव, ईरान संकट से सप्लाई पर असर
Overview

ईरान और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) कच्चे तेल की खरीद को लेकर बड़ा कदम उठा रहा है। कंपनी अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के हिसाब से स्पॉट मार्केट से तेल की खरीद बढ़ा रही है, ताकि रिफाइनरियों का संचालन जारी रह सके।

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सप्लाई में आई रुकावट, बढ़ाई स्पॉट खरीद

भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) कच्चे तेल के आयात में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव कर रहा है। कंपनी अब लगभग रोज अपनी जरूरतों का आकलन कर रही है और स्पॉट मार्केट से कच्चे तेल की खरीद में काफी बढ़ोतरी कर रही है। इसकी मुख्य वजह ईरान और मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष है, जिसने पारंपरिक सप्लाई रूट्स को बाधित कर दिया है। भारत जैसे बड़े तेल उपभोक्ता देश के लिए यह स्थिति कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई की अस्थिरता को बढ़ा रही है, खासकर हॉरमज जलडमरूमध्य के बंद होने से हालात और गंभीर हो गए हैं।

रिफाइनरी ऑपरेशन्स पर दबाव

BPCL की शुरुआती योजना यह थी कि वह अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा वार्षिक कॉन्ट्रैक्ट्स के ज़रिए हासिल करेगा, खासकर मध्य पूर्व के उत्पादकों से। लेकिन, खाड़ी क्षेत्र के कई सप्लायर्स द्वारा 'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) घोषित करने के बाद, कंपनी को अपनी 7,00,000 बैरल प्रति दिन की क्षमता वाली रिफाइनरियों को चालू रखने के लिए स्पॉट मार्केट से ज्यादा खरीद करनी पड़ रही है। कंपनी के चेयरमैन संजय खन्ना ने कहा है कि इस अनिश्चितता के कारण स्पॉट वॉल्यूम में काफी वृद्धि हुई है।

रूसी क्रूड पर घटता डिस्काउंट

BPCL अपनी जरूरत का लगभग 40-45% कच्चा तेल अभी भी रूसी क्रूड से पूरा कर रहा है, जिसे वह ज्यादातर स्पॉट मार्केट से खरीदती है। फाइनेंस डायरेक्टर वेत्सा रामकृष्ण गुप्ता के अनुसार, पहले अमेरिकी छूट (waivers) के चलते यह संभव था, लेकिन अब रूसी क्रूड पर मिलने वाला डिस्काउंट काफी कम हो गया है। पहले जहां $10-$12 प्रति बैरल का डिस्काउंट मिलता था, वहीं अब यह घटकर सिर्फ $5-$6 प्रति बैरल रह गया है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद, कंपनी इन ईंधनों पर अभी भी राजस्व का नुकसान झेल रही है।

भविष्य की सप्लाई की उम्मीदें

BPCL को उम्मीद है कि अगर सऊदी अरब से सप्लाई बेहतर होती है, खासकर किंगडम की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता बहाल होने के बाद, तो स्पॉट खरीद पर निर्भरता कम हो जाएगी। फिलहाल, इस पाइपलाइन के ज़रिए सऊदी अरब की प्रतिबद्धता सीमित है। यह रिफाइनर कंपनी प्रतिस्पर्धी कीमतों और लचीली शर्तों के साथ नए वार्षिक सप्लाई एग्रीमेंट्स की भी तलाश कर रही है। ऐसे में, वे वेनेजुएला और कनाडा जैसे दूर के सप्लायर्स के बजाय पास के सप्लायर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। BPCL के पास ब्राजील के साथ भी एक वैकल्पिक वार्षिक कच्चा तेल खरीद समझौता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.