Banas Dairy गुजरात में अपने बायो-CNG प्लांट का विस्तार कर रही है, जिससे कैटल-डंग प्रोसेसिंग क्षमता **340 टन** से बढ़कर **515 टन** प्रतिदिन हो जाएगी। यह पहल किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बनने के साथ ही सस्ता ईंधन भी उपलब्ध कराएगी।
Banas Dairy बायो-एनर्जी सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। गुजरात के बनासकांठा जिले के थराद और राधनपुर में नए बायो-CNG प्लांट शुरू किए गए हैं, जिससे कंपनी की प्रोसेसिंग क्षमता में 51% का बड़ा उछाल आया है। यह मॉडल ग्रामीण कचरे को ऊर्जा में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
किसानों और ग्राहकों को फायदा
इस बिजनेस मॉडल के तहत कंपनी किसानों से गोबर ₹1 प्रति किलो के भाव पर खरीद रही है, जिसका भुगतान सीधे उनके दूध के बिल के साथ किया जाता है। दूसरी तरफ, तैयार बायो-CNG को ₹75-80 प्रति किलो के भाव पर बेचा जा रहा है, जो बाजार में मौजूद सामान्य CNG (करीब ₹92 प्रति किलो) की तुलना में काफी किफायती है।
भविष्य की योजनाएं
Banas Dairy का लक्ष्य भविष्य में 200 प्लांट का नेटवर्क तैयार करना है, जो प्रतिदिन 24,000 टन गोबर को प्रोसेस कर सके। यह प्रोजेक्ट भारत-जापान साझेदारी का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर में 1,000 बायोगैस प्लांट बनाने का लक्ष्य है। इसके अलावा, प्लांट से निकलने वाला 'भूमि अमृत' ब्रांड का ऑर्गेनिक खाद भी अतिरिक्त रेवेन्यू देगा। सरकारी अनुमान के मुताबिक, अगर यह पूरा सिस्टम सही तरीके से काम करता है, तो स्थानीय पशुपालकों को सालाना ₹875 करोड़ की अतिरिक्त आय हो सकती है। हालांकि, लंबी अवधि में सफलता के लिए सप्लाई चेन और परिचालन लागत को मैनेज करना कंपनी के लिए बड़ी चुनौती होगी।
