हूती विद्रोहियों द्वारा मोखा पोर्ट और मयुन द्वीप पर कब्जे के बाद वैश्विक व्यापारिक रूट खतरे में है। इस तनाव के चलते Brent Crude की कीमतें **$100** प्रति बैरल के ऊपर निकल गई हैं, जिससे भारतीय निवेशकों के लिए इंपोर्ट कॉस्ट बढ़ने और महंगाई का रिस्क पैदा हो गया है।
हूती ताकतों ने मोखा पोर्ट और मयुन द्वीप पर नियंत्रण कर लिया है, जो बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Strait) के लिए एक गंभीर खतरा है। यह समुद्री मार्ग ऊर्जा व्यापार की जीवनरेखा है। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में इस रूट से रोजाना 8.1 मिलियन बैरल तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही हुई थी। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता और सऊदी हवाई हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें $100 के स्तर को पार कर गई हैं।\n\n### भारतीय बाजार पर असर\n\nभारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए इस रूट की सुरक्षा भारत के लिए बेहद अहम है। तेल की बढ़ती कीमतें भारत के इंपोर्ट बिल को बढ़ाएंगी, जिससे चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) और रुपये की वैल्यू पर दबाव बढ़ सकता है।\n\n### OMCs और अन्य सेक्टर पर दबाव\n\nIndian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। यदि कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं और ये कंपनियां रिटेल ईंधन की कीमतों में तुरंत बदलाव नहीं कर पाती हैं, तो उनके प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा।\n\nइसके अलावा, पेंट, टायर और केमिकल जैसे सेक्टर, जो पेट्रोकेमिकल्स पर निर्भर हैं, उन्हें भी बढ़ती इनपुट कॉस्ट का सामना करना पड़ सकता है। यदि कंपनियां इस लागत को उपभोक्ताओं पर नहीं डाल पाईं, तो उनके मुनाफे में गिरावट तय है।\n\n### सप्लाई चेन और रसद की चुनौतियां\n\nयदि बाब अल-मंडेब का रास्ता असुरक्षित होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के 'केप ऑफ गुड होप' से होकर गुजरना पड़ेगा, जिससे यात्रा का समय और माल ढुलाई का खर्च (Freight Cost) काफी बढ़ जाएगा। यह अतिरिक्त खर्च अंततः महंगाई को और बढ़ा सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजर Brent Crude की मूवमेंट और OMCs के मैनेजमेंट कमेंट्री पर बनी रहनी चाहिए।
