यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट अब करीब 42% पूरा हो चुका है। यह महत्वपूर्ण बढ़त नवंबर 2025 में 'फोर्स मेज्योर' (force majeure) हटने के बाद संभव हुई है, जिससे 6,000 से अधिक कर्मचारियों और आवश्यक उपकरणों को साइट पर फिर से तैनात किया जा सका है। यह मोजाम्बिक LNG प्रोजेक्ट BPCL की एनर्जी सप्लाई को विविध बनाने की रणनीति का एक अहम हिस्सा है और भारत के गैस-आधारित अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को भी समर्थन देता है।
इस प्रोजेक्ट में एक भारी-भरकम निवेश शामिल है। शुरुआती अनुमान $20 अरब का था, जो अब बढ़कर $24 अरब से भी ऊपर चला गया है। इसमें बढ़ती महंगाई, सुरक्षा व्यवस्था पर होने वाला खर्च और पुनः कार्य शुरू करने की लागत शामिल है। BPCL की इस प्रोजेक्ट में 10% हिस्सेदारी है, जबकि भारतीय कंसोर्टियम पार्टनर ONGC Videsh Ltd की 16% और Oil India Ltd की 30% हिस्सेदारी है। इस प्रोजेक्ट को मार्च 2021 में आतंकवादी हमलों के कारण बड़ा झटका लगा था, जिसके चलते TotalEnergies को 'फोर्स मेज्योर' घोषित करना पड़ा था। सुरक्षा की स्थिति में सुधार के बाद नवंबर 2025 में इसे हटा लिया गया, जिससे निर्माण कार्य फिर से शुरू हो सका।
प्रोजेक्ट में निरंतर प्रगति के बावजूद, BPCL के लॉन्ग-टर्म आउटलुक और विशेष रूप से इसके विदेशी निवेशों को लेकर निवेशकों में कुछ संदेह बना हुआ है। कंपनी का स्टॉक फिलहाल करीब ₹307 पर ट्रेड कर रहा है, जिसका ट्रेलिंग 12-महीने का P/E रेश्यो करीब 5.5 है। यह P/E दर्शाता है कि बाजार इसे एक परिपक्व, कम ग्रोथ वाली कंपनी मान रहा है। पिछले 1 साल में शेयर में करीब 3% की गिरावट भी आई है, जो ऐसे बड़े और लंबे समय तक चलने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स को लेकर निवेशक की सावधानी को उजागर करती है। एनालिस्ट्स का नजरिया भी सतर्क है। HDFC Securities ने 'REDUCE' रेटिंग के साथ ₹250-₹275 का टारगेट प्राइस दिया है, जबकि Prabhudas Lilladher ने ₹381 के टारगेट के साथ 'SELL' की सलाह दी है। ये टारगेट वर्तमान ट्रेडिंग प्राइस से काफी बड़ी संभावित गिरावट का संकेत देते हैं।
प्रोजेक्ट से पहली LNG डिलीवरी 2029 तक आने की उम्मीद है, जो कि मूल 2024-2025 के लक्ष्यों से काफी देरी है। यह लंबा डेवलपमेंट फेज भारत के गैस-आधारित अर्थव्यवस्था के विस्तार और ऊर्जा आयात स्रोतों को विविध बनाने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेगा। साथ ही, BPCL का लक्ष्य 2040 तक स्कोप 1 और 2 उत्सर्जन में नेट-जीरो हासिल करना है, जो कंपनी की भविष्य की योजनाओं को दर्शाता है।
