Bharat Petroleum Corporation Ltd (BPCL) ने रूस से तेल आयात घटाने का फैसला किया है। नवंबर महीने के लिए कंपनी अब मिडिल ईस्ट के सप्लायर्स पर फोकस बढ़ा रही है, जिसकी मुख्य वजह बढ़ता फ्रेट कॉस्ट और रूसी तेल पर मिलने वाले डिस्काउंट में कमी है। साथ ही, मुंबई और कोच्चि रिफाइनरी में मेंटेनेंस के चलते उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
भारत की सरकारी रिफाइनर कंपनी BPCL अपनी क्रूड ऑयल प्रोक्योरमेंट स्ट्रैटेजी में बड़ा बदलाव कर रही है। जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी ने अपनी कुल जरूरतों का करीब 37% कच्चा तेल रूस से मंगाया था, लेकिन अब रूसी तेल का आकर्षण कम हो गया है। कंपनी के फाइनेंस हेड, वत्सा रामकृष्ण गुप्ता के मुताबिक, फ्रेट यानी ढुलाई का खर्च बढ़ने की वजह से अब मिडिल ईस्ट से तेल मंगाना ज्यादा किफायती साबित हो रहा है।
घटते डिस्काउंट का असर
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारतीय रिफाइनर्स को रूसी तेल पर $12-$13 प्रति बैरल का भारी डिस्काउंट मिलता था, जो अब घटकर मात्र $1-$2 प्रति बैरल के आसपास रह गया है। शिपिंग की बढ़ती लागत के साथ मिलकर यह डिस्काउंट अब नाकाफी हो गया है, जिसके चलते BPCL को अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए सप्लायर्स बदलने पड़ रहे हैं।
मेंटेनेंस के चलते उत्पादन में कमी
निवेशकों को यह भी ध्यान रखना होगा कि आने वाले महीनों में कंपनी की रिफाइनरी ऑपरेशन्स पर असर पड़ेगा। BPCL की मुंबई रिफाइनरी में 30 दिन और कोच्चि रिफाइनरी में 30 से 40 दिन तक मेंटेनेंस का काम चलेगा। यह रूटीन प्रक्रिया रिफाइनरी की सुरक्षा के लिए जरूरी है, लेकिन इससे शॉर्ट टर्म में कंपनी के प्रोडक्शन वॉल्यूम में गिरावट देखी जा सकती है।
आंध्र प्रदेश प्रोजेक्ट पर नजर
अपने कैपिटल स्ट्रैटेजी को बेहतर बनाने के लिए BPCL अब अपने आंध्र प्रदेश स्थित प्रस्तावित रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स में कम से कम 30% हिस्सेदारी बेचने के लिए पार्टनर्स की तलाश कर रही है। कंपनी का लक्ष्य अपने कैपिटल खर्च को नियंत्रित करना और नई परियोजनाओं को मैनेज करना है।
