BPCL ने अक्टूबर के लिए कच्चे तेल की अपनी केवल **55%** जरूरतों को ही सुरक्षित किया है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और रूसी तेल पर संभावित प्रतिबंधों के कारण कंपनी के सामने चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। कंपनी ने जून 2026 तिमाही में **₹3,962 करोड़** का बड़ा नुकसान दर्ज किया है।
कच्चे तेल की सप्लाई में अनिश्चितता
पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता का असर कंपनी की लॉजिस्टिक्स पर पड़ रहा है। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में बढ़ते दबाव के चलते क्रूड इंपोर्ट की लागत बढ़ गई है। फिलहाल कंपनी का 35% से 45% हिस्सा रशियन क्रूड पर निर्भर है, और अमेरिकी प्रतिबंधों की स्थिति में इसे बदलना कंपनी के लिए महंगा सौदा साबित हो सकता है।
फाइनेंशियल प्रेशर और फंड जुटाने की योजना
कंपनी अपने ऑपरेशंस और बीना रिफाइनरी के विस्तार के लिए नकदी जुटाने की कोशिश कर रही है। इसी के तहत कंपनी ने ₹5,000 करोड़ तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) जारी करने की मंजूरी दी है। यह फंड ऐसे समय पर जुटाया जा रहा है जब जून तिमाही में कंपनी को ₹3,962 करोड़ का शुद्ध घाटा उठाना पड़ा है।
रेगुलेटरी मार और मार्केट का मूड
ऑपरेशनल चुनौतियों के अलावा, कंपनी को रेगुलेटरी स्तर पर भी झटका लगा है। बोर्ड कंपोजिशन के नियमों का पालन न करने और इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की कमी के कारण NSE और BSE ने कंपनी पर ₹14.66 लाख का जुर्माना लगाया है। इन तमाम दबावों के चलते BPCL के शेयर फिलहाल ₹316–317 के दायरे में ट्रेड कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
आने वाले समय में निवेशकों को क्रूड प्रोक्योरमेंट कॉस्ट और बीना रिफाइनरी के प्रोजेक्ट की रफ्तार पर बारीक नजर रखनी होगी। कंपनी का लक्ष्य मई 2028 तक रिफाइनरी कैपेसिटी को 11 मिलियन टन तक ले जाना है, जो इसकी लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
