BP अब भारत के तेल और गैस सेक्टर में अपनी पकड़ और मजबूत करने की तैयारी में है। कंपनी Reliance Industries के साथ नए ऑफशोर ब्लॉक्स में उतरने और ONGC के साथ मिलकर पुराने फील्ड्स से प्रोडक्शन बढ़ाने पर काम कर रही है।
देश के एनर्जी प्रोडक्शन पर नजर
BP भारत के अपस्ट्रीम सेक्टर में अपने विस्तार के लिए पूरी तरह तैयार है। कंपनी सरकार की 'ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी' (OALP) और 'डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड' (DSF) राउंड्स में बोली लगाने की योजना बना रही है। सरकार द्वारा विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए ज्यादा ऑफशोर क्षेत्र उपलब्ध कराने के फैसले से कंपनी उत्साहित है।
ONGC के साथ टेक्निकल पार्टनरशिप
ONGC के लिए यह साझेदारी उसके सबसे अहम एसेट्स को संभालने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। BP वर्तमान में मुंबई हाई और वेस्टर्न ऑफशोर फील्ड्स के लिए टेक्निकल एडवाइजरी सर्विस दे रही है। इसका मुख्य लक्ष्य इन पुराने फील्ड्स में नेचुरल डिक्लाइन (उत्पादन में गिरावट) को रोकना और रिकवरी रेट को बेहतर बनाना है।
BP के अनुमान के मुताबिक, मुंबई हाई में 60% और वेस्टर्न ऑफशोर में 25% तक प्रोडक्शन बढ़ने की संभावना है। निवेशकों के लिए यह डेवलपमेंट इसलिए अहम है क्योंकि ये फील्ड्स कंपनी के कुल प्रोडक्शन का बड़ा हिस्सा हैं।
Reliance Industries के साथ नई उम्मीदें
एक्सप्लोरेशन के मोर्चे पर, BP अपने पुराने पार्टनर Reliance Industries (RIL) के साथ मिलकर काम कर रही है। दोनों कंपनियां पहले ही KG-D6 बेसिन में सफल रही हैं और अब वे शैलो-वॉटर एक्सप्लोरेशन के नए अवसरों को तलाश रही हैं। साथ मिलकर काम करने से दोनों दिग्गजों को हाई-स्टेक्स एक्सप्लोरेशन का रिस्क और लागत बांटने में मदद मिलेगी।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और रिस्क
निवेशकों को इस रणनीति से जुड़ी जटिलताओं को भी समझना होगा। डीप-वॉटर एक्सप्लोरेशन और पुराने फील्ड्स को रिवाइव करना काफी महंगा और चुनौतीपूर्ण काम है। सेक्टर में प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन, रेगुलेटरी क्लियरेंस और कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू होने में लगने वाला लंबा समय हमेशा से रिस्क फैक्टर रहे हैं।
इसके अलावा, क्रूड ऑयल की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव भी निवेश की आर्थिक व्यवहार्यता पर असर डाल सकता है। फिलहाल, नजरें आगामी सरकारी बिडिंग राउंड्स और ONGC द्वारा मुंबई हाई से आने वाले प्रोडक्शन डेटा पर टिकी हैं।
