विनीत मित्तल के नेतृत्व वाली Avaada Electro अब घरेलू सोलर मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दे रही है। कंपनी अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए ₹7,600 करोड़ का IPO लाने की योजना बना रही है। हालांकि, निवेशकों को कंपनी के भारी कर्ज और ग्रुप रेवेन्यू पर निर्भरता पर नजर रखनी चाहिए।
घरेलू मैन्युफैक्चरिंग पर विनीत मित्तल का विजन
Avaada Group के चेयरमैन विनीत मित्तल ने हाल ही में जोर दिया है कि भारत के रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को सिर्फ इंस्टालेशन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पूरी सोलर वैल्यू चेन में महारत हासिल करनी चाहिए। इसी विजन के तहत, ग्रुप की मैन्युफैक्चरिंग आर्म, Avaada Electro अब ₹7,600 करोड़ का IPO लाने की तैयारी में है। कंपनी का मकसद विदेशी पार्ट्स पर निर्भरता कम करके सोलर सेल्स और मॉड्यूल्स का घरेलू स्तर पर उत्पादन करना है।
ऑपरेशंस का विस्तार और ALMM लिस्टिंग
कंपनी ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को तेजी से बढ़ाया है। नवंबर 2026 तक, Avaada Electro ने अपनी 7,117 MW (यानी 7.1 GW) की TOPCon सोलर सेल कैपेसिटी को नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) की ALMM लिस्ट में शामिल करा लिया है। यह लिस्टिंग कंपनी के लिए गेम-चेंजर है, क्योंकि इसके जरिए वे सरकारी प्रोजेक्ट्स में सोलर मॉड्यूल्स की सप्लाई कर पाएंगे, जहां डिमांड काफी ज्यादा रहती है।
निवेशकों के लिए चेतावनी और चुनौतियां
IPO में पैसा लगाने से पहले निवेशकों को कुछ अहम पहलुओं पर गौर करना होगा। कंपनी का बिजनेस मॉडल आक्रामक विस्तार पर टिका है, जिसके लिए भारी-भरकम कैपिटल खर्च (Capex) की जरूरत होती है। इस कारण कंपनी पर कर्ज का स्तर काफी ज्यादा है और डेट-टू-इक्विटी रेशियो भी ऊंचा बना हुआ है।
इसके अलावा, कंपनी की रेवेन्यू स्ट्रक्चर में 'कंसंट्रेशन रिस्क' है। अब तक कंपनी का एक बड़ा हिस्सा रेवेन्यू, ग्रुप की दूसरी कंपनियों जैसे कि Avaada Energy के साथ किए गए ट्रांजेक्शंस से आया है। भविष्य में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या कंपनी अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के दम पर बाहरी ग्राहकों को जोड़ पाती है और अपने कर्ज की लागत को कैसे मैनेज करती है।
