एशियाई ऑयल रिफाइनर (Asian Oil Refiners) यमन के हौथी विद्रोहियों के हमलों के डर से लाल सागर (Red Sea) के यानबू बंदरगाह से सितंबर महीने का कच्चा तेल (Crude Oil) उठाने से कतरा रहे हैं। इस वजह से शिपिंग और बीमा लागत बढ़ने की आशंका है, जिससे भारतीय कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव पड़ सकता है।
लाल सागर में तेल उठाना हुआ मुश्किल
लाल सागर (Red Sea) में हौथी विद्रोहियों (Houthi militants) के बढ़ते हमलों के चलते एशियाई रिफाइनर (Asian refiners) यनबू (Yanbu) बंदरगाह से तेल लेने से हिचकिचा रहे हैं। इस वजह से जहाज मालिकों (vessel owners) के लिए भी इस रास्ते से टैंकर भेजना मुश्किल होता जा रहा है। यह स्थिति प्रमुख खरीदारों और Saudi Aramco के बीच सितंबर की डिलीवरी को लेकर एक स्टैंडऑफ (standoff) पैदा कर रही है।
सप्लाई रूट बदलने की मांग
कम से कम दो बड़े एशियाई रिफाइनरों ने तो बाकायदा मांग की है कि तेल पिकअप लोकेशन बदलकर भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) पर स्थित मिस्र के सिदी केरिर (Sidi Kerir) बंदरगाह कर दिया जाए। हालांकि, यह बदलाव उन्हें लाल सागर के खतरनाक रास्ते से बचाएगा, लेकिन इससे लॉजिस्टिक्स (logistics) की बड़ी समस्याएं खड़ी हो जाएंगी। सिदी केरिर से लिया गया माल एशिया तक पहुंचने के लिए अफ्रीका का चक्कर लगाकर आना पड़ेगा, जिसमें ईंधन की खपत, यात्रा का समय और परिचालन लागत (operational costs) काफी बढ़ जाएगी।
भारतीय कंपनियों पर क्या होगा असर?
निवेशकों (investors) के लिए सबसे बड़ी चिंता तेल रिफाइनिंग कंपनियों (oil refining companies) के मुनाफे पर पड़ने वाले असर की है। भारत सहित कई एशियाई रिफाइनर मध्य पूर्व (Middle East) से कच्चे तेल का आयात (import) करती हैं। अगर रिफाइनरों को लाल सागर से बचने के लिए ज्यादा फ्रेट (freight) और वॉर-रिस्क इंश्योरेंस (war-risk insurance) प्रीमियम देना पड़ता है, तो इससे उनके ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (Gross Refining Margins) पर बोझ बढ़ सकता है। कुछ ट्रेडरों का तो यह भी कहना है कि लागत इतनी ज्यादा बढ़ सकती है कि रिफाइनर अपनी मासिक क्रूड (crude) की सप्लाई लेना ही बंद कर दें, अगर उन्हें कोई सस्ता विकल्प नहीं मिला तो।
Saudi Aramco का रुख
Saudi Aramco पारंपरिक रूप से इन सप्लाई को अपने लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स (long-term contracts) के तहत मैनेज करती आई है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी ने कुछ जापानी और दक्षिण कोरियाई रिफाइनरों को सुरक्षित भूमध्यसागरीय बंदरगाह पर जाने की अनुमति दे दी है। लेकिन चीन, ताइवान और भारत के बड़े खरीदार अभी भी यनबू जाने के लिए निर्देशित किए जा रहे हैं। रूट के विकल्पों में इस असंगति (inconsistency) से उन रिफाइनरों के लिए मुश्किल पैदा हो गई है, जिनकी सप्लाई चेन (supply chains) में ज्यादा लचीलापन (flexibility) नहीं है।
बढ़ती चिंताएं
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब पता चलता है कि कई टैंकर छिपने के लिए अपने ट्रांसपोंडर (transponders) बंद करके चल रहे हैं। इससे सप्लाई फ्लो (supply flows) को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है और ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन (global oil supply chain) की पारदर्शिता (transparency) और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं।
आगे क्या?
बाजार के प्रतिभागी (market participants) अब इस पर नजर रखेंगे कि क्या Aramco अपने एशियाई ग्राहकों को स्थिर सप्लाई वॉल्यूम (stable supply volumes) बनाए रखने के लिए पिकअप लोकेशन में ज्यादा लचीलापन दिखाती है। भारतीय ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (Indian oil marketing companies) के शेयरधारकों (shareholders) के लिए, आने वाली तिमाहियों में फ्रेट और बीमा लागत (freight and insurance costs) में कोई भी लगातार बढ़ोतरी उनकी परिचालन दक्षता (operational efficiency) और मुनाफे को प्रभावित कर सकती है। क्षेत्रीय सुरक्षा तनाव (regional security tensions) में किसी भी तरह की बढ़ोतरी ग्लोबल ऑयल लॉजिस्टिक्स (global oil logistics) के लिए एक बड़ा जोखिम बनी रहेगी।
