तेल की कीमतों में लगी आग
सोमवार, 2 मार्च 2026 को Saudi Aramco की Ras Tanura रिफाइनरी को निशाना बनाते हुए एक ड्रोन हमला हुआ, जिसमें एक छोटी सी आग लगी जिसे तुरंत बुझा लिया गया। इस घटना ने तुरंत ग्लोबल ऑयल मार्केट को हिला दिया। Brent Crude फ्यूचर्स में लगभग 7% से 13% तक की तेजी आई, और यह 14 महीने के उच्चतम स्तर, यानी $77.55 से $82 प्रति बैरल के बीच पहुँच गया। West Texas Intermediate (WTI) क्रूड में भी इसी तरह का उछाल देखा गया। यह तेज प्रतिक्रिया दर्शाती है कि मार्केट मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई को लेकर किसी भी खतरे के प्रति कितना संवेदनशील है। इससे पहले, रविवार को Saudi Aramco के शेयर में भी 2.5% की बढ़ोतरी देखी गई थी।
क्यों है यह घटना इतनी गंभीर?
Ras Tanura रिफाइनरी, जिसकी प्रतिदिन 550,000 बैरल कच्ची तेल को रिफाइन करने की क्षमता है, सऊदी अरब के विशाल रिफाइनिंग और एक्सपोर्ट ऑपरेशंस का एक अहम हिस्सा है। ग्लोबल एनर्जी फ्लो बनाए रखने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका इसे अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल में एक स्थायी टारगेट बनाती है। यह घटना सितंबर 2019 के हमलों की याद दिलाती है, जब Saudi Aramco की Abqaiq और Khurais सुविधाओं पर हुए ड्रोन हमलों ने रोजाना 5 मिलियन बैरल से अधिक के प्रोडक्शन को रोक दिया था और तेल की कीमतों में 14% से 20% तक का उछाल आया था।
मिडिल ईस्ट का बढ़ता तनाव
मिडिल ईस्ट अमेरिका और ईरान के बीच टेंशन का केंद्र बना हुआ है, और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहाँ से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, एक बड़ा रणनीतिक कमजोरी का बिंदु है। इस बढ़ते खतरे के माहौल ने तेल की कीमतों में एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम (geopolitical risk premium) जोड़ दिया है, जो लगभग $4 से $10 प्रति बैरल तक हो सकता है। Saudi Aramco, जिसकी मार्केट कैप मार्च 2026 तक लगभग $1.663 ट्रिलियन USD है, एक विशाल कंपनी है और इसकी स्थिरता वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है।
भविष्य की चिंताएं और आउटलुक
हालांकि Ras Tanura में आग पर तुरंत काबू पा लिया गया, लेकिन ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर बार-बार होने वाले हमलों से उत्पन्न होने वाला सिस्टमिक रिस्क कम नहीं हुआ है। यह रिफाइनरी ग्लोबल एनर्जी मार्केट को बाधित करने या राजनीतिक दबाव बनाने वालों के लिए एक बड़ा लक्ष्य बनी हुई है, जिससे भविष्य में और भी ज्यादा नुकसानदायक हमले होने का खतरा बना हुआ है। भौतिक हमलों के अलावा, Saudi Aramco ने 2012 में 'Shamoon' वायरस हमले जैसी गंभीर साइबर सुरक्षा कमजोरियों का भी सामना किया है, जिसने हजारों वर्कस्टेशनों को प्रभावित किया था।
वैश्विक अर्थव्यवस्था मध्य पूर्वी कच्चे तेल, खासकर सऊदी सप्लाई पर बहुत ज्यादा निर्भर है, इसलिए छोटे-छोटे व्यवधान भी कीमतों में बड़ा असर डालते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के कारण मार्केट की भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ गई है। विश्लेषकों का अनुमान है कि कीमतों में यह उछाल बना रह सकता है, क्योंकि OPEC+ द्वारा उत्पादन में 206,000 बैरल प्रतिदिन की मामूली बढ़ोतरी संभावित बड़े व्यवधान को दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।
