Adani Green को Andhra Pradesh से मिली मंजूरी, पर लगी शर्तें | कानूनी तूफान के बीच डील पक्की

ENERGY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Adani Green को Andhra Pradesh से मिली मंजूरी, पर लगी शर्तें | कानूनी तूफान के बीच डील पक्की
Overview

आंध्र प्रदेश सरकार ने Adani Green Energy (AGEL) के साथ **300 MW** की सोलर पावर डील को हरी झंडी दे दी है। यह मंजूरी कुछ खास शर्तों के साथ आई है, खासकर तब जब कंपनी गंभीर कानूनी आरोपों का सामना कर रही है।

आंध्र प्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए Adani Green Energy Limited (AGEL) और Solar Energy Corporation of India (SECI) के बीच 300 MW की सोलर पावर सप्लाई एग्रीमेंट (PSA) को चालू करने की मंजूरी दे दी है। यह ऑर्डर 26 फरवरी, 2026 को जारी किया गया, जिससे पावर की शेड्यूलिंग और ऑफटेक शुरू हो सकेगा। यह कदम ऐसे समय में आया है जब पिछले 15 महीनों से कंपनी पर लगे रिश्वतखोरी के आरोपों के बादल मंडरा रहे थे।

सशर्त मंजूरी और वित्तीय दांव

हालांकि, इस मंजूरी में एक खास शर्त जोड़ी गई है। राज्य सरकार ISTS (इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम) चार्ज और आंध्र प्रदेश की परिधि तक लगने वाले नुकसान का भुगतान नहीं करेगी। यह संभवतः राज्य के वित्तीय बोझ को कम करने के लिए उठाया गया कदम है। राज्य सरकार पिछले कुछ समय से इस एग्रीमेंट को रद्द करने के वित्तीय असर और वैकल्पिक रणनीतियों पर गौर कर रही थी।

कानूनी तूफान और रेगुलेटरी जांच

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब Adani Green Energy (AGEL) गंभीर कानूनी जांचों का सामना कर रही है। अमेरिका की Securities and Exchange Commission (SEC) ने पिछले साल नवंबर 2024 में गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी के खिलाफ एक सिविल केस दायर किया था। आरोप है कि उन्होंने ऊपर-बाजार दरों पर बिजली खरीद दरें हासिल करने के लिए रिश्वतखोरी का सहारा लिया। इसी के चलते, नॉर्वे के सॉवरेन वेल्थ फंड ने 26 फरवरी, 2026 को 'गंभीर भ्रष्टाचार' का हवाला देते हुए AGEL को अपने पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया। AGEL का कहना है कि वह इन प्रोसीडिंग्स का पक्षकार नहीं है और कंपनी पर कोई आरोप नहीं हैं। ये आरोप सितंबर 2021 के एक नोट ऑफरिंग से जुड़े हैं, जिसने अमेरिकी निवेशकों से $175 मिलियन जुटाए थे। भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों ने भी AGEL से इन SEC प्रोसीडिंग्स से संबंधित खबरों पर स्पष्टीकरण मांगा है।

वैल्यूएशन, ग्रोथ और चिंताएं

Adani Green Energy Limited (AGEL) का मार्केट वैल्यूएशन काफी मजबूत है। फरवरी 2026 तक इसका P/E (प्राइस-टू-अर्निंग्स) रेशियो लगभग 106.054 है, जो यूटिलिटीज सेक्टर के अपने साथियों के औसत 17.7x P/E से काफी ज्यादा है। कंपनी ने पिछले 5 सालों में औसतन 37.5% की मजबूत कमाई (earning) ग्रोथ दिखाई है। फाइनेंशियल ईयर 25 में इसका नेट प्रॉफिट 58.8% बढ़कर ₹20,010 मिलियन हो गया था। हालिया ट्रेडिंग सेशन में कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन ₹1,56,045.20 करोड़ बताई गई थी। हालांकि, इन भारी उम्मीदों और प्रीमियम वैल्यूएशन के बीच, हाल की तिमाही के नतीजे विश्लेषकों की उम्मीदों से कुछ कम भी रहे हैं, जिससे इसके भविष्य के विकास को बनाए रखने की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं। कंपनी के नेट प्रॉफिट मार्जिन में भी 11.5% से घटकर 10.8% की गिरावट देखी गई है।

भविष्य की राह और सेक्टर ट्रेंड्स

आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा ISTS चार्ज से छूट की शर्त AGEL के लिए एक संभावित वित्तीय चुनौती पेश करती है। ऐतिहासिक रूप से, ISTS छूट रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन रही है, लेकिन जून 2028 के बाद ज्यादातर प्रोजेक्ट्स के लिए यह छूट खत्म हो जाएगी। राज्य की ओर से इस छूट पर जोर देना, भविष्य में प्रोजेक्ट की कमाई या शर्तों पर फिर से बातचीत को प्रभावित कर सकता है। NTPC Renewable Energy Limited या ReNew Energy Global PLC जैसे प्रतिस्पर्धियों के विपरीत, AGEL को रिश्वतखोरी के आरोपों के कारण अतिरिक्त जांच का सामना करना पड़ रहा है। यह कानूनी जोखिम, ISTS छूट के बदलते परिदृश्य के साथ मिलकर, एक अनिश्चित माहौल बना रहा है, जो भविष्य के प्रोजेक्ट्स के इकोनॉमिक्स पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर लगातार तेजी से बढ़ रहा है। नवंबर 2025 तक कुल रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता लगभग 254 GW तक पहुंच गई है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक 500 GW नॉन-फॉसिल फ्यूल क्षमता हासिल करना है, जिसे भारत जून 2025 तक ही 50% पावर कैपेसिटी नॉन-फॉसिल स्रोतों से हासिल करके पार कर चुका है। साल 2025 में भारत ने रिकॉर्ड 44.5 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता जोड़ी। इस सेक्टर में स्टोरेज और हाइब्रिड कंपोनेंट्स वाले प्रोजेक्ट्स पर जोर बढ़ रहा है। जबकि रेगुलेटरी माहौल आम तौर पर सपोर्टिव है, आंध्र प्रदेश डील जैसे प्रोजेक्ट अप्रूवल्स, इस सेक्टर में चल रही बातचीत और जोखिम प्रबंधन को दर्शाते हैं। जुलाई 2025 से नए प्रोजेक्ट्स के लिए ISTS छूट का खत्म होना, पावर ट्रांसमिशन की लागत बढ़ा सकता है। एनालिस्ट्स रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को लेकर सकारात्मक हैं, लेकिन AGEL को रिश्वतखोरी के आरोपों और इस तरह के सशर्त अनुबंधों से जुड़ी व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.