Amazon अब खुद बिजली उत्पादन के क्षेत्र में उतर गया है। कंपनी ने इंडियाना में **960-मेगावाट** का न्यूक्लियर एनर्जी प्रोजेक्ट शुरू करने का ऐलान किया है, जिसके लिए American Electric Power और X-energy के साथ साझेदारी की गई है।
Amazon ने अपनी डेटा सेंटर्स की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी American Electric Power और X-energy के साथ मिलकर एक 960-मेगावाट का न्यूक्लियर फैसिलिटी प्लांट लगाने जा रही है। यह प्लांट एक बंद हो चुके पुराने कोल (कोयला) प्लांट की जगह पर बनाया जाएगा, जो ऊर्जा के पारंपरिक साधनों से एडवांस न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी की ओर एक बड़ा बदलाव है।
क्यों है यह डील जरूरी?
AI और क्लाउड सर्विसेज के विस्तार के कारण डेटा सेंटर्स को 24/7 निरंतर बिजली की जरूरत है, जिसे सोलर या विंड एनर्जी से पूरा करना मुश्किल होता है। इस जरूरत को देखते हुए, Amazon 12 स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (Xe-100) का इस्तेमाल करेगा। यह प्रोजेक्ट साल 2039 तक अमेरिका में 5 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता हासिल करने के कंपनी के लक्ष्य का हिस्सा है।
निवेशक ध्यान दें: जोखिम और चुनौतियां
हालांकि यह एक महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन न्यूक्लियर सेक्टर में पुराने समय से ही देरी और लागत बढ़ने (Cost overrun) का इतिहास रहा है। यह तकनीक अभी शुरुआती स्तर पर है और पूरी तरह कमर्शियल इस्तेमाल के लिए अभी इसे बड़े इम्तिहान से गुजरना होगा। इसके अलावा, X-energy को रेगुलेटरी मंजूरी और एनवायरमेंटल कंप्लायंस से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर प्रोजेक्ट की टाइमलाइन और बजट पर पड़ सकता है।
भारत जैसे देशों के लिए, जहाँ डेटा सेंटर्स का तेजी से विस्तार हो रहा है, यह एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या भारत में भी टेक कंपनियां ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए इस तरह के सीधे निवेश या पार्टनरशिप का मॉडल अपनाती हैं या नहीं।
