Amazon ने स्वीडन में चार विंड फार्म्स के साथ **200 मेगावाट** बिजली के लिए समझौता किया है, जिससे देश में उसकी कुल रिन्यूएबल कैपेसिटी अब **1 गीगावाट** के पार पहुंच गई है। यह कदम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाले डेटा सेंटर्स की भारी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए उठाया गया है।
एआई (AI) की बढ़ती भूख
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग के दौर में डेटा सेंटर्स की बिजली खपत काफी बढ़ गई है। Amazon अपनी इन फैसिलिटीज के लिए फॉसिल-फ्री ऊर्जा जुटाने पर जोर दे रहा है। यह विस्तार कंपनी की बड़ी योजनाओं का हिस्सा है, जिसके तहत 2028 तक वैश्विक स्तर पर अपने डेटा सेंटर्स में 20 लाख नए Nvidia ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPUs) को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए एस्किल्स्टुना (Eskilstuna) और वेस्टरस (Vasteras) जैसे क्षेत्रों में ऊर्जा की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
फाइनेंशियल ईयर 2026 और भारी खर्च
Amazon अपने डेटा सेंटर नेटवर्क को खड़ा करने के लिए बड़े पैमाने पर पैसा खर्च कर रहा है। कंपनी ने 2026 के लिए अपने कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) गाइडेंस को बढ़ाकर लगभग $220 बिलियन कर दिया है। इसका मुख्य कारण Amazon Web Services (AWS) की जबरदस्त डिमांड है। 2026 की दूसरी तिमाही में AWS का रेवेन्यू 37% साल-दर-साल बढ़ा है, जो क्लाउड और AI सेवाओं की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए जोखिम (Investment Risks)
तेजी से हो रहा यह विस्तार निवेशकों के लिए चुनौतियां भी लेकर आया है। डेटा सेंटर्स और महंगे चिप्स पर भारी खर्च अगर भविष्य में उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं देता है, तो मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, इतने बड़े प्रोजेक्ट्स में सप्लाई चेन की देरी और पर्यावरण संबंधी रेगुलेटरी जांच जैसे जोखिम भी बने हुए हैं। फिलहाल निवेशकों की नजरें इस बात पर हैं कि क्या Amazon अपनी इन इंफ्रास्ट्रक्चर लागतों को मैनेज करते हुए मुनाफे को बरकरार रख पाएगा।
