आंध्र प्रदेश सरकार ने अपनी नई राजधानी Amaravati में पूरी तरह से निजी बिजली वितरण नेटवर्क स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार ने इसके लिए निजी कंपनियों से बोलियां (Bids) आमंत्रित की हैं, जो ग्रेटर नोएडा मॉडल की तर्ज पर काम करेंगी।
निजीकरण का नया मॉडल
आंध्र प्रदेश सरकार अपनी नई राजधानी Amaravati को भविष्य के शहर के रूप में विकसित कर रही है। इसके तहत राज्य सरकार ने शहर के पूरे पावर डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल सप्लाई नेटवर्क को डिजाइन करने, बनाने और उसे मैनेज करने के लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया है। यह मॉडल ग्रेटर नोएडा में चल रहे Noida Power Company Limited (NPCL) की तर्ज पर होगा, जो पहले से ही एक सफल मॉडल माना जाता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव और अवसर
यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से अंडरग्राउंड बिजली वितरण नेटवर्क पर आधारित होगा। हालांकि, इसमें शुरुआती कैपिटल खर्च (Capital Spending) पारंपरिक सिस्टम के मुकाबले काफी ज्यादा होगा, लेकिन यह सुरक्षा और शहर की खूबसूरती को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और केबल बनाने वाली कंपनियों के लिए यह एक लंबा और बड़ा अवसर साबित हो सकता है।
क्या है संभावनाएं और चुनौतियां?
सरकारी अनुमानों के अनुसार, साल 2050 तक इस शहर की आबादी करीब 3.55 मिलियन तक पहुंच सकती है, जिससे बिजली की डिमांड में लगातार बढ़ोतरी होगी। निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि इस तरह के प्रोजेक्ट्स में मुनाफा नियामक फैक्टर्स जैसे टैरिफ कैप और बिल कलेक्शन की कुशलता पर निर्भर करेगा।
बड़े खिलाड़ियों की नजर
इस सेक्टर में Torrent Power, Tata Power और Adani Electricity जैसे दिग्गज पहले से ही काम कर रहे हैं। अगर Amaravati का यह मॉडल सफल रहता है, तो यह देश के अन्य नए ग्रीनफील्ड शहरों के लिए एक बेंचमार्क बनेगा। निवेशकों को टेंडर की शर्तों और सरकार के साथ होने वाले एग्रीमेंट्स पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं से प्रोजेक्ट की प्रॉफिटेबिलिटी तय होगी।
