Akasa Air और BPCL ने मुंबई से गोवा के बीच **1%** सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) ब्लेंड के साथ एक कमर्शियल उड़ान पूरी की है। यह पायलट प्रोजेक्ट भारत के **2030** तक **5%** SAF ब्लेंडिंग के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
भारत के एविएशन सेक्टर में ग्रीन एनर्जी की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। 8 सितंबर, 2026 को Akasa Air और Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) ने मुंबई से गोवा के बीच अपनी पहली कमर्शियल उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की, जिसमें 1% सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (SAF) का उपयोग किया गया। यह दोनों कंपनियों के बीच जुलाई 2026 में हुए समझौते का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत में greener फ्यूल के विकल्पों को तैयार करना है।
BPCL की बदलती रणनीति
Bharat Petroleum के लिए SAF का यह कदम अपने एनर्जी पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करने का एक बड़ा प्रयास है। कंपनी मुंबई, कोच्चि और बीना स्थित अपनी रिफाइनरियों में इसके उत्पादन की क्षमता बढ़ाने पर काम कर रही है। भविष्य में सख्त कार्बन उत्सर्जन नियमों को देखते हुए, यह निवेश कंपनी के मार्जिन और भविष्य की ग्रोथ के लिए बेहद अहम है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि कंपनी अपनी रिफाइनरी अपग्रेडिंग और कैपिटल स्पेंडिंग को कैसे मैनेज करती है।
Akasa Air का ऑपरेशनल फोकस
वहीं, Akasa Air अपनी फ्लीट की फ्यूल एफिशिएंसी को लेकर काफी सक्रिय है। कंपनी अपने Boeing 737 MAX एयरक्राफ्ट और CFM LEAP-1B इंजन के जरिए ईंधन की खपत कम करने पर जोर दे रही है। इसके अलावा, एयरलाइन SkyBreathe जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रही है, ताकि उड़ान के दौरान फ्यूल की बर्बादी को रोका जा सके।
चुनौती: क्या महंगा होगा सफर?
इस सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती SAF की ऊंची उत्पादन लागत है, जो पारंपरिक जेट फ्यूल से कहीं अधिक है। इसकी कमर्शियल सफलता पूरी तरह से डोमेस्टिक सप्लाई चेन की मैच्योरिटी और सरकार की पॉलिसी पर निर्भर करेगी। यदि भविष्य में सरकार टैक्स इंसेंटिव या मैंडेट लेकर आती है, तो यह सेक्टर और तेजी से आगे बढ़ सकता है। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह 1% का प्रयोग आगे चलकर बड़े स्तर पर कैसे लागू होता है।
